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This Article is From Jul 05, 2020

MP Board: 24 किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल जाने वाली रोशनी की मेहनत लाई रंग, 10वीं क्लास में हासिल किए 98.75 प्रतिशत अंक

रोशनी के पिता किसान है. उन्होंने अपनी बेटी द्वारा प्राप्त किए गए अंकों के बारे में बात करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है और वह अब अपनी बेटी के स्कूल जाने के लिए एक वाहन का इंतजाम करेंगे.

MP Board: 24 किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल जाने वाली रोशनी की मेहनत लाई रंग, 10वीं क्लास में हासिल किए 98.75 प्रतिशत अंक
प्रतीकात्मक तस्वीर
नई दिल्ली:

मध्य प्रदेश के एक गांव में रहने वाली 15 साल की लड़की ने 10वीं क्लास में 98.75 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं. यह लड़की रोज 24 किलोमीटर साइकिल चलाकर स्कूल जाया करती थी और आखिरकार इस लड़की की मेहनत रंग लाई है. 15 साल की रोशनी भदौरिया को 10वीं में मिले अंकों से प्रेरणा मिली है और इस वजह से वह अपनी आगे की पढ़ाई की तैयारी में लग गई है. वह सिविल सर्विस में अपना करियर बनाना चाहती है. 

रोशनी के पिता किसान है. उन्होंने अपनी बेटी द्वारा प्राप्त किए गए अंकों के बारे में बात करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है और वह अब अपनी बेटी के स्कूल जाने के लिए एक वाहन का इंतजाम करेंगे. रोशनी मध्यप्रदेश के चंबल के भिंड के गांव अजनोल में रहती है. 

रोशनी ने मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं की परीक्षाओं में 8वां स्थान प्राप्त करते हुए 98.57 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. बता दें मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के नतीजे शनिवार को जारी किए गए हैं. रोशनी के पिता ने पीटीआई को बताया कि ''8वीं तक उनकी बेटी एक अन्य स्कूल में थी, जहां बस की सुविधा थी लेकिन उसके बाद रोशनी का दाखिला मेहगांव के एक सरकारी स्कूल में करा दिया गया, जो अजनोल से 12 किलोमीटर दूर है. साथ ही वहां जाने के लिए वाहन की सुविधा नहीं है.'' 

उन्होंने कहा, ''9वीं क्लास में रोशनी का दाखिला मेहगांव के सरकारी स्कूल में हो गया था और वाहन की सुविधा न होने की वजह से रोशनी को स्कूल पहुंचने के लिए साइकिल से जाना पड़ता था.'' रोशनी के पिता ने कहा, वह अपनी को स्कूल पहुंचाने के लिए वाहन का इंतजाम करेंगे.

रोशनी के दो भाई भी हैं. अपनी बेटी के अच्छे अंक प्राप्त करने के बारे में बात करते हुए रोशनी के पिता ने कहा कि अजनोल में सभी लोग बहुत खुश हैं क्योंकि आज तक गांव में किसी के इतने अच्छे नंबर नहीं आए हैं. रोशनी से जब स्कूल के उनके एक्सपीरिंयस के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ''साइकिल से स्कूल जाना मुश्किल था. मैंने गिना तो नहीं लेकिन मैं एक साल में 60 से 70 दिन साइकिल चला कर ही स्कूल जाया करती थी. मेरे पिताजी के पास जब वक्त होता था तो वह खुद कई बार मुझे अपनी मोटरसाइकिल से स्कूल ले जाया करते थे''.

रोशनी ने कहा कि वह सिलिव सर्विस की परीक्षा देना चाहती हैं और आईएएस बनना चाहती हैं. मेहगांव के सरकारी स्कूल की प्रिंसिंप ने भी रोशनी को शुभकामनाएं दीं. 

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