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This Article is From Sep 27, 2018

आसान नहीं है बाबा रामदेव के गुरुकुल 'आचार्यकुलम' में एडमिशन, जानिए पूरी प्रक्रिया

उत्तराखंड के हरिद्वार में आज बाबा रामदेव के गुरुकुल आचार्यकुलम के नए परिसर का उद्घाटन हुआ.

आसान नहीं है बाबा रामदेव के गुरुकुल 'आचार्यकुलम' में एडमिशन, जानिए पूरी प्रक्रिया
आचार्यकुलम
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नई दिल्ली: उत्तराखंड के हरिद्वार में आज बाबा रामदेव के गुरुकुल आचार्यकुलम के नए परिसर का उद्घाटन हुआ. उद्घाटन खुद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने किया. साल 2013 में शुरू हुए बाबा रामदेव के आचार्यकुलम का उद्घाटन नरेंद्र मोदी ने किया था और जब से आचार्यकुलम शुरू हुआ है तभी से चर्चा में है क्योंकि इसको आज के दौर का मॉडर्न गुरुकुल भी कहा जाता है जहां पर आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ वेद की शिक्षा और संस्कृत भी पढ़ाई जाती है. आइए जानते हैं की आज के दौर के मॉडर्न गुरुकुल आचार्यकुलम में दाखिले की क्या प्रक्रिया है.

क्या है आचार्यकुलम में दाखिले की प्रक्रिया
आचार्यकुलम में दाखिले के लिए पूरे देश में परीक्षाएं भी जाती हैं यह परीक्षा हर साल दिसंबर महीने के दूसरे रविवार को रखी जाती है इस परीक्षा में सामान्य ज्ञान, अंग्रेजी, रिजनिंग और करंट अफेयर्स के सवाल होते हैं. पूरे देश में कुल शहरों के केंद्रों पर इसका टेस्ट होता है. कुल 500 बच्चों को पहले राउंड में चुना जाता है और उसके बाद 7 दिन के लिए सभी बच्चों को उनके माता-पिता के साथ हरिद्वार आचार्यकुल में रखा जाता है.

7 दिन तक स्वामी रामदेव खुद एक एक बच्चे को देखते हैं और उसकी क्षमता परखते हैं और इसी के आधार पर आखरी में 160 बच्चों को आचार्यकुलम में दाखिले के लिए योग्य माना जाता है. 160 बच्चों में 80 लड़के और 80 लड़कियां होती हैं. 

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किस कक्षा में होता है दाखिला
आचार्यकुलम में केवल पांचवी कक्षा में ही दाखिला दिया जाता है और फिर उसको 12वीं तक पढ़ाया जाता है. 1 अप्रैल को जिस बच्चे की उम्र 9 वर्ष से कम और 11 वर्ष से अधिक नहीं है वह पांचवी कक्षा में दाखिले के लिए आवेदन कर सकता है । 2013 में शुरू हुआ आचार्यकुलम का पहला बैच अब 11वीं तक पहुंच गया है यानी उस समय को बच्चे पांचवी में दाखिल हुए थे वह अगले साल 12वीं में पहुंच जाएंगे.

कितनी है फीस?
आचार्यकुलम में पांचवी में जब दाखिला होता है तो बच्चे से 1 साल के ₹1,80,000 लिए जाते हैं जिसमें ट्यूशन फीस के साथ साथ बच्चे के रहने खाने का खर्चा भी शामिल होता है. इसमें 10 हज़ार रुपये इंप्रेस्ट के नाम के माने जाते हैं. इम्प्रेस्ट यानि छात्र या छात्रा को विद्यालय के स्टोर से जो कुछ सामान लेना होता है उसका पैसा. साथ ही 10 हज़ार रुपये की सिक्योरिटी भी. जिस साल बच्चे का दाखिला होता है उस साल कुल 1 लाख 80 हजार रुपये लिए जाते हैं जबकि बाद में सालाना 1 लाख 40 हजार रुपये माता पिता को देने होते हैं. फीस दो किस्तों में दी जा सकती है.

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