चंडीगढ़:
हरियाणा की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा चयनित 9 हजार 455 जूनियर बेसिक ट्रेनिंग (जेबीटी) शिक्षकों की नियुक्ति पर लगी रोक पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हटा दी हे। जब केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला ने चयन प्रक्रिया में परीक्षा परिणाम में कोई छेड़छाड़ नहीं पाए जाने की रिपोर्ट दी तो न्यायमूर्ति ऋतु बाहरी ने यह लगी रोक हटा दी।
सरकार के पास था 10 हफ्ते का समय
उच्च न्यायालय ने पिछले साल अगस्त में सरकार को उनकी नियुक्ति के लिए दस हफ्ते के अंदर सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने को कहा था। नियमित जेबीटी शिक्षकों की नियुक्ति होने तक उनके हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए अदालत ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि पहले से जो उम्मीदवार चयनित हैं, उनकी तकनीकी सत्यापन की प्रक्रिया में तेजी लाएं और दस हफ्ते के अंदर उसे पूरी करें, ताकि उन्हें नियुक्ति पत्र जारी हो सके।
हरियाणा विद्यालय शिक्षक चयन बोर्ड ने 2014 के अगस्त में इन शिक्षकों का चयन किया था। उस समय भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे। भाजपा सरकार ने उस चयन बोर्ड को भंग कर चयन से जुड़े सारे रिकार्ड हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के हवाले कर दिया था।
अंकों का था विवाद
जेबीटी शिक्षकों की ओर से याचिका में कहा गया था कि उन्हें छह सितंबर, 2014 को जब परीक्षा परिणाम घोषित किया गया तो स्नातकोत्तर योग्यता के बदले दो अंक नहीं दिए गए थे। बाद में उनके अभ्यावेदन पर संशोधित परिणाम जारी किया गया और उन्हें स्नातकोत्तर के दो अंक का लाभ दिया गया। लेकिन उसी समय उनके साक्षात्कार के दो अंक कम कर दिए गए, जिसकी पहले ही घोषणा की जा चुकी थी।
सरकार के पास था 10 हफ्ते का समय
उच्च न्यायालय ने पिछले साल अगस्त में सरकार को उनकी नियुक्ति के लिए दस हफ्ते के अंदर सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने को कहा था। नियमित जेबीटी शिक्षकों की नियुक्ति होने तक उनके हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगाते हुए अदालत ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया था कि पहले से जो उम्मीदवार चयनित हैं, उनकी तकनीकी सत्यापन की प्रक्रिया में तेजी लाएं और दस हफ्ते के अंदर उसे पूरी करें, ताकि उन्हें नियुक्ति पत्र जारी हो सके।
हरियाणा विद्यालय शिक्षक चयन बोर्ड ने 2014 के अगस्त में इन शिक्षकों का चयन किया था। उस समय भूपेंद्र सिंह हुड्डा मुख्यमंत्री थे। भाजपा सरकार ने उस चयन बोर्ड को भंग कर चयन से जुड़े सारे रिकार्ड हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के हवाले कर दिया था।
अंकों का था विवाद
जेबीटी शिक्षकों की ओर से याचिका में कहा गया था कि उन्हें छह सितंबर, 2014 को जब परीक्षा परिणाम घोषित किया गया तो स्नातकोत्तर योग्यता के बदले दो अंक नहीं दिए गए थे। बाद में उनके अभ्यावेदन पर संशोधित परिणाम जारी किया गया और उन्हें स्नातकोत्तर के दो अंक का लाभ दिया गया। लेकिन उसी समय उनके साक्षात्कार के दो अंक कम कर दिए गए, जिसकी पहले ही घोषणा की जा चुकी थी।
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