“शेरा दी कौम पंजाबी” ये पंक्तियां सिर्फ़ फ़िल्मी गानों तक ही नहीं सिमटी हैं, आपको आम जिंदगी में भी ऐसी कई मिसालें मिल जाएंगी. पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन की सिविल सेवा परीक्षा में पहले नंबर पर आए देवदर्शदीप ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. पटियाला के रहने वाले 24 साल के देवदर्शदीप ने ये स्थान बिना किसी कोचिंग के अपने प्रयास में हासिल किया है. इतना ही नहीं, वे इस बार हुई इंडियन फॉरेस्ट सर्विस में भी रैंक 12 लाकर अपना बेहतरीन प्रदर्शन कर चुके हैं.
एनडीटीवी से बातचीत में देवदर्शदीप ने कहा कि किसी को भी सिविल सर्विसेज में आने के पहले ये बात जरूर सोचनी चाहिए कि आखिर वो ऐसा क्यों करना चाहता है. अगर कोई सिर्फ पावर के लिए या फिर दूसरों को अपनी कामयाबी दिखाने की नियत से ऐसा करता है तो ये गलत है. देव मानते हैं कि आपका मकसद दूसरों की सेवा करना या उनकी जिंदगी को बेहतर करने का हो तभी किसी को इसका लक्ष्य रखना चाहिए.
-
EU-इंडिया ट्रेड डील ट्रैक पर, साल के अंत तक मुहर मुमकिन-NDTV WORLD Summit में बोले EU राजदूत -
NDTV वर्ल्ड समिट 2026 | भारतीय एविएशन को नई ताकत, GE Aerospace अगले 9–10 साल में देगा 3,200 इंजन -
NDTV WORLD SUMMIT : जर्मनी, इटली और यूरोपीय यूनियन के राजदूत ने क्या कुछ कहा -
AI से नहीं खत्म होंगी नौकरियां! टेक दिग्गज Andrew Ng ने बताया क्यों बेवजह है ‘Job Apocalypse’ का डर -
राज्यों के CM के बीच हो CEO जैसी रेस... निखिल कामत ने देश की तरक्की के लिए बताया नया फॉर्मूला -
NDTV वर्ल्ड समिट 2026: अप्रेजल और शादी के जिक्र पर क्या बोले निखिल कामत? -
AI नहीं खा सकता आपकी नौकरी, बस करना होगा ये काम, टेक दिग्गज Andrew Ng ने किया दावा -
NDTV World Summit 2026:निखिल कामत ने देश की तरक्की के लिए बताया फॉर्मूला, राज्यों के CM के बीच हो CEO जैसी रेस -
कार की सर्विस समय पर कराते हैं, शरीर की क्यों नहीं? लीलावती अस्पताल के ट्रस्टी की काम की सलाह -
क्या AI इस जमाने का असुर है? न्यू यॉर्क वेदांत सोसाइटी के रेजिडेंट मिनिस्टर स्वामी सर्वप्रियानंद ने दिया जवाब
देवदर्शदीप ने साल 2016 में आईआईटी दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की और इस परीक्षा की तैयारी में जुट गए. इसके लिए उन्होंने पिछले साल के प्रश्न पत्रों को आधार बनाया फिर नियमित अध्ययन के जरिए अपनी पहली ही कोशिश में अव्वल आ गए. उनका मानना है कि जुनून, सकारात्मकता और दृढ़ता से इस मुश्किल लक्ष्य में भी सफ़लता प्राप्त की जा सकती हैं. देवदर्शदीप को पहेलियां सुलझाना बेहद पसंद है और इसके अलावा वे पढ़ाने में भी खासी दिलचस्पी रखते हैं.
अपनी कामयाबी से परिवार और पटियाला का नाम रोशन करने वाले देवदर्शदीप के पिता डॉ दर्शन सिंह अष्ट बच्चों की कहानी के जाने माने लेखक हैं और उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है. उनकी माताजी पंजाब यूनिवर्सिटी में पंजाबी भाषा की प्रोफेसर हैं. देवदर्श दीप की ये कामयाबी अपने लक्ष्य को लेकर संघर्ष कर रहे नौजवानों के मन में जहां एक उम्मीद जगाती है वहीं हौसला भी देती है.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं