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This Article is From Dec 26, 2019

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एडमिशन को स्टूडेंट फ्रेंडली बनाने के लिए मांगे सुझाव

दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) इस बात पर भी विचार कर रही है कि एडमिशन की प्रक्रिया को अकादमिक सत्र के शुरू होने के साथ ही खत्म कर दिया जाए.

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने एडमिशन को स्टूडेंट फ्रेंडली बनाने के लिए मांगे सुझाव
Delhi University Admission: डीयू ने एडमिशन को स्टूडेंट फ्रेंडली बनाने के लिए सुझाव मांगे हैं.
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नई दिल्ली:

दिल्ली यूनिवर्सिटी (Delhi University) ने अगले साल होने वाले एडमिशन को स्टूडेंट्स के लिए सरल और बेहतर बनाने के लिए यूनिवर्सिटी के सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं. मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी की नीतियों के अंतर्गत सुझाव मांगे गए हैं. एडमिशन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने से पहले सभी पक्षों के सुझावों पर गौर किया जाएगा. गौरतलब है कि इससे पहले नई शिक्षा नीति के लिए मंत्रालय को एक महीने के भीतर 65000 से अधिक सुझाव मिले थे. बता दें कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में 90 कॉलेज, 16 फैकेल्टी, 87 विभाग और 13 सेंटर हैं. 

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एडमिशन की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए उन सभी स्टूडेंट्स से सुझाव लिए जाएंगे जो कि ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए रजिस्टर करेंगे. इन सुझावों की मदद से यूनिवर्सिटी ऑनलाइन एडमिशन को और भी सरल बनाने की दिशा में काम करेगी. जिन बातों को लेकर यूनिवर्सिटी द्वारा सुझाव मांगे गए हैं उनमें "मेरिट आधारित एडमिशन में कट ऑफ निर्धारित करना, ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन स्तर पर छात्रों के एडमिशन में देखी जानी वाली योग्यता और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए स्टूडेंट्स को कम से कम यूनिवर्सिटी आना पड़े" शामिल है.

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यूनिवर्सिटी एडमिशन में सहूलियत के लिए सिंगल एडमिशन फॉर्म पर विचार कर रहा है. एडमिशन के समय बहुत से फॉर्म होने से स्टूडेंट्स के साथ-साथ यूनिवर्सिटी प्रशासन के लिए भी असमंजस की स्थिति पैदा हो जाती है. बता दें कि यूनिवर्सिटी छात्रों और उनके अभिभावकों की सुविधा के लिए ओपन डे आयोजित करता है, जिसमें एडमिशन को लेकर स्टूडेंट्स और अभिभावकों को सवालों के जवाब दिए जाते हैं. यूनिवर्सिटी ओपन डे में कोशिश करती है कि वह स्टूडेंट्स की समस्याओं का ज्यादा से ज्यादा समाधान कर सके. 

खास बात ये है कि यूनिवर्सिटी इस बात पर भी विचार कर रही है कि एडमिशन की प्रक्रिया को अकादमिक सत्र के शुरू होने के साथ ही खत्म कर दिया जाए, जिससे कि स्टूडेंट्स की पढ़ाई का नुकसान न हो. साथ ही यूनिवर्सिटी में आरक्षित सीटों पर एडमिशन की प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर विचार किया जा रहा है. 

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