
नयी दिल्ली:
एक अहम फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की सेलेक्टिव री-चेकिंग पॉलिसी को खारिज कर दिया है. सीबीएसई की इस पॉलिसी के तहत छात्र केवल चुनिंदा 10 विषयों और प्रति विषय 10 प्रश्नों की री-चेकिंग के लिए ही आवेदन कर सकते थे. लेकिन अब कोर्ट के फैसले के बाद छात्र सभी विषयों की परीक्षाओं की री-चेकिंग करा सकते हैं.
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक छात्रों को राहत देते हुए चीफ जस्टिस जी रोहिणी और जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने इस रोक को 'विचित्र' करार दिया और कहा कि छात्र प्रत्येक विषय की री-इवेल्यूशन करा सकते हैं.
दो छात्रों के हक में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि यह अजीब है कि बोर्ड पहले छात्रों को री-चेकिंग की सुविधा देता है और फिर उस सहूलियत पर अनुचित प्रतिबंध लगाता है. बोर्ड अपनी मर्जी से किसी छात्र द्वारा किए गए री-चेकिंग के दावे की अनदेखी नहीं कर सकता. री-चेकिंग के लिए कुछ विषयों और प्रश्नों का चुनाव सही नहीं है.
बोर्ड ने छात्रों को री-चेकिंग के आवेदन की अनुमति देने के लिए अपनी परीक्षा नीति में एक नियम बनाया था. लेकिन इस नियम को कुछ विषयों और प्रश्नों की री-चेकिंग तक ही सीमित कर दिया था. कोर्ट ने इन नियमों को अन्यायपूर्ण, पक्षपातपूर्ण और अनुचित माना.
कोर्ट ने कहा कि अगर कोई छात्र परीक्षा के लिए जी-तोड़ मेहनत करता है और उम्मीद के मुताबिक उसका रिजल्ट नहीं आता है तो अपनी उत्तर-पुस्तिक की री-चेकिंग कराना उसका अधिकार है.
अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर के मुताबिक छात्रों को राहत देते हुए चीफ जस्टिस जी रोहिणी और जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल की पीठ ने इस रोक को 'विचित्र' करार दिया और कहा कि छात्र प्रत्येक विषय की री-इवेल्यूशन करा सकते हैं.
दो छात्रों के हक में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि यह अजीब है कि बोर्ड पहले छात्रों को री-चेकिंग की सुविधा देता है और फिर उस सहूलियत पर अनुचित प्रतिबंध लगाता है. बोर्ड अपनी मर्जी से किसी छात्र द्वारा किए गए री-चेकिंग के दावे की अनदेखी नहीं कर सकता. री-चेकिंग के लिए कुछ विषयों और प्रश्नों का चुनाव सही नहीं है.
बोर्ड ने छात्रों को री-चेकिंग के आवेदन की अनुमति देने के लिए अपनी परीक्षा नीति में एक नियम बनाया था. लेकिन इस नियम को कुछ विषयों और प्रश्नों की री-चेकिंग तक ही सीमित कर दिया था. कोर्ट ने इन नियमों को अन्यायपूर्ण, पक्षपातपूर्ण और अनुचित माना.
कोर्ट ने कहा कि अगर कोई छात्र परीक्षा के लिए जी-तोड़ मेहनत करता है और उम्मीद के मुताबिक उसका रिजल्ट नहीं आता है तो अपनी उत्तर-पुस्तिक की री-चेकिंग कराना उसका अधिकार है.
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