यह ख़बर 26 अप्रैल, 2014 को प्रकाशित हुई थी

मिडकैप, स्मॉलकैप में सेंसेक्स से ज्यादा तेजी

मुंबई:

देश के शेयर बाजारों में पिछले सप्ताह प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी मामूली तेजी के साथ बंद हुए। इस दौरान बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में सेंसेक्स और निफ्टी के मुकाबले ज्यादा तेजी रही।

बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक सेंसेक्स पिछले सप्ताह 0.26 फीसदी या 59.23 अंकों की तेजी के साथ शुक्रवार को 22,688.07 पर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का 50 शेयरों पर आधारित संवेदी सूचकांक निफ्टी 0.05 फीसदी या 3.35 अंकों की मामूली तेजी के साथ 6,782.75 पर बंद हुआ।

पिछले सप्ताह गुरुवार, 24 अप्रैल को आम चुनाव के मद्देनजर शेयर बाजार बंद रहे और चार दिन-सोमवार, मंगलवार, बुधवार और शुक्रवार-ही कारोबारी सत्र संचालित हुए।

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से पिछले सप्ताह 16 में तेजी रही। महिंद्रा एंड महिंद्रा (7.31 फीसदी), एलएंडटी (6.30 फीसदी), भेल (5.36 फीसदी), भारती एयरटेल (4.91 फीसदी) और एक्सिस बैंक (4.77 फीसदी) में सर्वाधिक तेजी रही। गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे विप्रो (11.24 फीसदी), हिंदुस्तान यूनिलीवर (4.73 फीसदी), एनटीपीसी (3.45 फीसदी), आईटीसी (2.72 फीसदी) और सिपला (1.59 फीसदी)।

मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में गत सप्ताह सेंसेक्स के मुकाबले अधिक तेजी रही। मिडकैप 0.47 फीसदी या 34.35 अंकों की तेजी के साथ 7,373.64 पर बंद हुआ। स्मॉलकैप 0.97 फीसदी या 73.33 अंकों की तेजी के साथ 7,597.34 पर बंद हुआ।

पिछले सप्ताह के प्रमुख घटनाक्रमों में गत सप्ताह सभी चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी ने अपने जीवनकाल के ऐतिहासिक उच्च स्तर को छुआ और सोमवार तथा बुधवार को दोनों ऐतिहासिक उच्च स्तर पर बंद हुए। शुक्रवार को सेंसेक्स और निफ्टी ने क्रमश: 22,939.31 और 6,869.85 के ऊपरी स्तर को छुआ।

पिछले हफ्ते देश में आम चुनाव जारी रहा। इसके परिणाम का शेयर बाजार की चाल पर प्रमुखता से असर होगा। चुनाव सात अप्रैल से शुरू हुआ और यह 12 मई तक नौ चरणों में संपन्न होगा और मतगणना 16 मई को होगी।

गुरुवार को भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आगामी मानसून के मौसम (जून-सितंबर) में बारिश कम होने की भविष्यवाणी की है। मौसम कार्यालय की भविष्यवाणी के मुताबिक मानसूनी बारिश पांच फीसदी की घट-बढ़ की मॉडल त्रुटि के साथ 89 सेंटीमीटर के दीर्घावधि औसत के 95 फीसदी रहने का अनुमान जताया।

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मानसून का देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर होता है। इसके कमजोर रहने से कृषि प्रभावित हो सकती है, महंगाई बढ़ सकती है और इससे अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं।