खास बातें
- सीबीआई ने ट्राई को तकनीकी तथा व्यावसायिक जांच के बाद स्पेक्ट्रम का मूल्य निकालने को कहा था। यदि आप ट्राई के निचले मूलय को भी लें, तो यह अलग हटकर नहीं है।'
नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को दिल्ली की एक अदालत को बताया कि दूरसंचार नियामक ट्राई द्वारा स्पेक्ट्रम का सालाना मूल्य निकालने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट 2007-08 में 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में हुए 30,000 करोड़ रुपये के नुकसान के उसके (सीबीआई) आकलन के साथ मेल खाता है। विशेष सरकारी वकील यूयू ललित ने विशेष सीबीआई जज ओपी सैनी की अदालत को बताया, सीबीआई ने ट्राई को तकनीकी तथा व्यावसायिक जांच के बाद स्पेक्ट्रम का मूल्य निकालने को कहा था। यदि आप ट्राई के निचले मूलय को भी लें, तो यह अलग हटकर नहीं है। तथ्य यह है कि निचले नुकसान का उनका अनुमान हमारे अनुमान से मेल खाता है। हालांकि सरकारी वकील ने कहा कि वह ट्राई द्वारा उस रपट के साथ सीबीआई को भेजे गए आवरण-पत्र के कुछ हिस्सों को सबूत के रुप में इस्तेमाल नहीं करना चाहेंगे। समिति की रपट के कवरिंग लेटर में ट्राई के संबंधित अधिकारी ने सीबीआई को लिखा है कि ट्राई ने कभी 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी की सिफारिश नहीं की थी और स्पेक्ट्रम का मूल्य मान्यताओं पर आधारित रखा गया था। ललित ने कहा, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि हम इस दस्तावेज पर निर्भर नहीं कर रहे हैं। इसे वापस लेने का सवाल पैदा नहीं होता। मैं सिर्फ यह चाहता हूं कि फिलहाल इस दस्तावेज को रिकार्ड में न लिया जाए। संबंधित रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकारी वकील ने कहा कि 2001 में ट्राई ने इसका मूल्य 1,202.91 करोड़ रुपये निकाला था, 2008 में यह 9,500 करोड़ रुपये था, जिसमें बाद में संशोधन किया गया। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ समिति ने बाद में 9,500 करोड़ रुपये के मूल्य को घटाकर 5,444 करोड़ रुपये कर दिया। ललित ने कहा कि उन्होंने निचले स्तर का मूल्य लिया है। 30,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा तर्कसंगत है और यह सही है। उन्होंने स्वान टेलीकाम के प्रवर्तक शाहिद उस्मान बलवा की इस दलील को खारिज कर दिया कि सीबीआई विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को रिकार्ड पर न लेकर मुकदमे की प्रक्रिया को भटका रही है। उन्होंने कहा कि इस अपील को सुना भी नहीं जाना चाहिए। किस तरह हम कुछ दस्तावेजों को अपने दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। ललित ने सीबीआई द्वारा विधि मंत्रालय द्वारा स्वान टेलीकाम को रिलायंस टेलीकाम लि. का सहायक न बताने की राय का इस्तेमाल न करने का भी बचाव किया। आरोपी की अपील कि विधि मंत्रालय की रिपोर्ट को रिकार्ड पर लिया जाए, का विरोध करते हुए उन्होंने कहा, सीबीआई को इस तरह का कोई निर्देश नहीं है।