यह ख़बर 03 जुलाई, 2014 को प्रकाशित हुई थी

सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय की मुसीबत और बढ़ी

फाइल फोटो

नई दिल्ली:

निवेशकों के रुपये न लौटाने के लिए जेल में बंद सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय की मुसीबत बढ़ती जा रही हैं। अब आयकर विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा है कि सहारा की तीनों कंपनियों पर उसका करीब 48 सौ करोड़ रुपये का टैक्स बकाया है, उसे भी दिलवाया जाए। ये टैक्स पिछले तीन साल का है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अभी इस मामले की सुनवाई नहीं की है. इधर, सहारा प्रमुख ने विदेश के तीन होटल बेचने के लिए सुप्रीम कोर्ट से 40 दिनों की सशर्त रिहाई मांगी है। सुप्रीम कोर्ट इसकी सुनवाई शुक्रवार को करेगा।

सुप्रीम कोर्ट में चली सुनवाई के दौरान सहारा प्रमुख के वकीलों ने बताया कि वह सेबी के एंकाउंट में 3117 करोड़ रुपये जमा करा चुके हैं और उसे फिलहाल दो हजार करोड़ का कैश और पांच हजार करोड़ की बैंक गारंटी भी देनी है। ये भी बताया गया है कि अहमदाबाद की एक संपत्ति 411 करोड़ रुपये में बेची गई है।

अभी देश की आठ संपत्ति और विदेश के तीन होटल भी बेचे जाने हैं। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सहारा से ये भी पूछा कि आखिर वह किस आधार पर मूल्यांकन करके संपत्ति का सौदा कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में ये भी देखा जाना है कि संपत्ति बेचने के मामले में कोई गड़बड़ न हो। इसके लिए कोर्ट को भी निगरानी रखनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा से पूछा कि वह कोर्ट को इस तरह भरोसा दिला सकते हैं कि इस डील में मार्केट रेट से कम में बिक्री नहीं हुई है या किसी तरह से काला धन तो नहीं इकट्ठा हुआ है।

इस बीच सहारा प्रमुख की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी लगाकर कहा गया कि बकाया राशि जुटाने के लिए सहारा प्रमुख को 40 दिनों के लिए सशर्त रिहाई मिलनी चाहिए। इस मामले में सेबी शुक्रवार को अपनी दलील देगा।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जिस तरह का रुख दिखाया है, उससे साफ है कि फिलहाल सुब्रत रॉय को राहत मिलने की संभावना कम ही है।

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कोर्ट ने सुनवाई के दौरान ये भी कहा कि दस हजार करोड़ रुपये का भुगतान सिर्फ सहारा प्रमुख को जेल से रिहा करने की शर्त है, जबकि उन्हें अब सेबी को कुल करीब 38 हजार करोड़ रुपये चुकाने हैं।