यह ख़बर 07 दिसंबर, 2013 को प्रकाशित हुई थी

चीनी मिलों को 7,200 करोड़ रुपये का पैकेज देने की सिफारिश

नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री द्वारा गठित कृषिमंत्री शरद पवार की अगुवाई वाले मंत्रियों के अनौपचारिक समूह ने चीनी उद्योग के लिए 7,200 करोड़ रुपये के ब्याजमुक्त ऋण पैकेज सहित कई राहतों की सिफारिश की है। इस कर्ज का उपयोग चीनी मिलें गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान करने के लिए करेंगी।

कृषिमंत्री शरद पवार की अगुवाई वाले मंत्रियों के अनौपचारिक समूह का गठन चीनी मिलों के नकदी संकट का समाधान तलाशने के लिए किया गया था। मिलें चालू सत्र में ऊंचे गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं कर पाई और उनका बकाया भी 3,400 करोड़ रुपये का हो गया।

भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने मंत्री समूह की सिफारिशों की सिफारिशों की सराहना करते हुए कहा है कि ऐसे उपाय से गन्ने के बकाये का भुगतान हो जाएगा और मिलों के पास नकदी प्रवाह बढ़ेगा।

समिति ने भारतीय रिजर्व बैंक के मानदंडों के अनुरूप चीनी मिलों के कर्ज को नए सिरे से तय करने का भी सुझाव दिया है। इसके अलावा 40 लाख टन तक कच्ची चीनी उत्पादन के लिए सहायता और बफर स्टॉक की स्थापना के अलावा पेट्रोल में इथनॉल सम्मिश्रण की मात्रा को बढ़ाकर 10 प्रतिशत करने का भी सुझाव दिया गया है।


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