यह ख़बर 10 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

मिलों की चीनी निर्यात तत्काल खोलने की मांग

खास बातें

  • संगठनों का कहना है कि ऐसा नहीं होने पर चीनी मिल मालिक गन्ना उत्पादकों की बकाया राशि का भुगतान नहीं कर पाएंगे।
New Delhi:

शीर्ष चीनी निकायों ने गुरुवार को सरकार से चीनी के सामान्य निर्यात की अनुमति देने का अनुरोध किया है। संगठनों का कहना है कि ऐसा नहीं होने पर चीनी मिल मालिक गन्ना उत्पादकों की बकाया राशि का भुगतान नहीं कर पाएंगे। आईएसएमए और एनएफसीएसएफ के प्रतिनिधियों ने यहां कहा कि गन्ना उत्पादकों की बकाया राशि बढ़ने देने से राकने के लिये सरकार को चीनी के सामान्य निर्यात की तत्काल अनुमति देनी चाहिए। मिलों को चीनी की बिक्री में 150 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान हुआ है। इंडियन सुगर मिल्स एसोसिएशन :आईएसएमए: और नेशनल फेडरेशन आफ कोअपरेटिव सुगर फैक्टरीज :एनएफसीएसएफ: ने यहां संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र को क्षेत्र पर लगे दो नियंत्रणों को हटाना चाहिए। इसमें एक मासिक बिक्री कोटा तथा मिलों से सस्ती दर पर राशन दुकानों को चीनी देना शामिल हैं। आईएसएमए के अध्यक्ष नरेंद्र मुरकुम्बी ने कहा, 30 लाख टन चीनी अधिशेष है। इसमें से 10 लाख टन पहले ही अग्रिम लाइसेंस स्कीम के तहत निर्यात हो चुके हैं। इसके अलावा शेष 20 लाख टन चीनी के निर्यात की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि गन्ना उत्पादों का बकाया दिसंबर 2010 तक 4,000 करोड़ रुपये था। देश में 2010-11 चीनी वर्ष :अक्तूबर-सितंबर: में चीनी उत्पादन 2.5 करोड़ टन रहने का अनुमान है। वहीं मांग 2.2 करोड़ टन रहने का अनुमान है।


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