यह ख़बर 27 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

मुदास्फीति पर अंकुश लगाना है जरूरी : सुब्बाराव

खास बातें

  • रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा कि आर्थिक वृद्धि हमेशा ही सोच-विचार का हिस्सा रही है लेकिन फिलहाल ध्यान मुद्रास्फीति पर है।
Mumbai:

रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा कि आर्थिक वृद्धि हमेशा ही केन्द्रीय बैंक की सोच विचार का हिस्सा रही है लेकिन फिलहाल उसका ज्यादा ध्यान मुद्रास्फीति को संतुलित स्तर पर लाने की तरफ है। सुब्बाराव ने कहा कि यदि आर्थिक वृद्धि की दर लगातार आठ प्रतिशत से नीचे रहती है तो वह सख्त मौद्रिक नीति से पीछे हट जाएगा। रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए आर्थिक वृद्धि को नजरंदाज कर रहा है उन्होंने इन आरोपों और आशंकाओं को दूर किया। मौद्रिक एवं ऋण नीति की पहली तिमाही समीक्षा जारी करने के बाद संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए सुब्बाराव ने कहा,  मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि आर्थिक वृद्धि रिजर्व बैंक की पॉलिसी राडार से कभी भी दूर नहीं रही है। हम हमेशा ही इसकी चिंता करते हैं। लेकिन हमें आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति के बीच संतुलन बिठाना है और फिलहाल मुद्रास्फीति हमारी सहज स्थिति से ऊंची है। सुब्बाराव ने कहा, यदि हम आठ प्रतिशत को आर्थिक वृद्धि का रुझान मानकर चलें और यदि यह लगातार इससे नीचे रहती है तो फिर हमारी नीति का झुकाव दूसरी तरफ हो सकता है। हालांकि, उन्होंने तुरंत इसमें यह भी जोड़ दिया कि आर्थिक वृद्धि के एक बार आठ प्रतिशत से नीचे आने से रिजर्व बैंक की नीति नहीं बदलेगी। सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी की वृद्धि दर अब कुछ ही मौकों पर आठ प्रतिशत से नीचे रही है। पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में और वित्त वर्ष 2008-09 में जब वैश्विक वित्तीय संकट का दौर था यह आठ प्रतिशत से नीचे रही।


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