नई दिल्ली: सस्ते आयात में बढ़ोतरी से जूझ रहे घरेलू स्टेनलेस स्टील उद्योग ने सरकार से अपील की है ऐसे उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत किया जाए.
स्टेनलेस स्टील की चादरों का आयात 2015-16 में 5.32 लाख टन हो गया, जो करीब 24 लाख टन की कुल घरेलू मांग का 25 प्रतिशत है.
उद्योग मंडल इंडिया स्टेनलेस स्टील डेवलपमेंट एसोसिएशन (आईएसएसडीए) ने कहा कि 2011-12 :3.07 लाख टन: से आयात पिछले साल तक 50 प्रतिशत बढ़ा है.
भारत करीब 30 लाख टन स्टेनलेस स्टील का उत्पादन करता है जिसका उपयोग मुख्य तौर पर रसोई से जुड़े उत्पादों के लिए होता है. इसके बाद इन उत्पादों का उपयोग उद्योग, इंजीनियरिंग, वाहन, रेलवे और भवन निर्माण में होता है.
आईएसएसडीए के अध्यक्ष एन सी माथुर ने कहा, ‘‘इस्पात की तरह स्टेनलेस क्षेत्र को भी सस्ते आयात का सामना करना पड़ रहा है जो घरेलू उपभोग का एक चौथाई है. हम सरकार से उद्योग की सुरक्षा का आग्रह कर रहे हैं.’’ उद्योग तैयार स्टेनलेस स्टील की चादर जैसे उत्पादों पर मूल सीमाशुल्क (बीसीडी) बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने की मांग कर रहा है, जो फिलहाल 7.5 प्रतिशत है.
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