अगले सप्ताह वाहन कम्पनियां बुधवार एक मई 2013 से अप्रैल 2013 में हुई बिक्री के आंकड़े जारी करेंगी, जिससे निवेशकों को विश्लेषण में मदद मिलेगी।
मार्किट इकनॉमिक्स बुधवार एक मई को अप्रैल के लिए एचएसबीसी इंडिया मैन्यूफैक्च रिंग पीएमआई जारी करेगी, जिससे देश की औद्योगिकी कम्पनियों की कारोबारी स्थिति का पता चलेगा। मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मार्च 2013 में 52 पर आ गई थी, जो फरवरी में तेजी के साथ 54.2 पर थी। मार्किट इकनॉमिक्स सेवा क्षेत्र की कम्पनियों से सम्बंधित पर्चेजिंग मैनेजर्स सूचकांक शुक्रवार तीन मई को जारी करेगी। मार्च में इसकी रीडिंग 51.4 थी, जो फरवरी में 54.2 पर थी। सेवा क्षेत्र का देश की अर्थव्यवस्था में 60 फीसदी योगदान है।
आरबीआई शुक्रवार तीन मई को 2013-14 के लिए मौद्रिक नीति की घोषणा करेगा। थोक मूल्य महंगाई में गिरावट आने के कारण उम्मीद की जा रही है कि आरबीआई रेपो दर कटौती करेगा। 19 मार्च 2013 को मध्य तिमाही मौद्रिक नीति समीक्षा में आरबीआई ने रेपो दर 25 आधार अंकों की कटौती के साथ 7.5 फीसदी कर दिया था।
ताजा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई दर मार्च 2013 में पिछले 40 महीने के निचले स्तर 5.96 फीसदी पर आ गई, जो फरवरी में 6.84 फीसदी थी। गैर-खाद्य विनिर्माण या प्रमुख उद्योगों की महंगाई दर मार्च में घटकर 3.41 फीसदी दर्ज की गई थी।
निवेशक अगले सप्ताह भी चौथी तिमाही के परिणामों पर नजर गड़ाए रहेंगे। सोमवार को परिणाम की घोषणा करने वाली प्रमुख कम्पनियों में है हेक्सावेयर टेक्नोलॉजी, हिंदुस्तान यूनिलीवर और स्टरलाइट इंडस्ट्रीज।
मंगलवार को परिणाम जारी करने वाली प्रमुख कम्पनियों में हैं शॉपर्स स्टॉप और टीवीएस मोटर।
बुधवार एक मई को परिणाम जारी करने वाली प्रमख कम्पनियां हैं आईडीएफसी और पंजाब सिंध बैंक।
गुरुवार को परिणाम जारी करने वाली कम्पनियों में प्रमुख हैं आंध्रा बैंक, भारती एयरटेल और कोटक महिंद्रा बैंक।
शुक्रवार को परिणाम जारी करने वाली कम्पनियों में प्रमुख हैं जेएसडब्ल्यू एनर्जी, एसीसी और अम्बुजा सीमेंट।
मौसम विभाग ने गत सप्ताह शुक्रवार को मानसून का प्रारम्भिक अनुमान जारी कर दिया है और सामान्य बारिश की सम्भावना बताई है। मानसून का देश की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ता है। सामान्य मानसून का अर्थ है अर्थव्यवस्था की बेहतरी की उम्मीद।
आने वाले कुछ महीनों में बाजार में शेयरों की व्यापक आपूर्ति के कारण शेयर बाजारों के सूचकांकों के ऊपर की ओर बढ़ने की उम्मीद कम है। शेयर बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के दिशानिर्देश के मुताबिक सूचीबद्ध निजी कम्पनियों में प्रमोटर की हिस्सेदारी घटानी होगी और आम निवेशकों को कम से कम 25 फीसदी हिस्सेदारी देनी होगी। इसी तरह सरकारी सूचीबद्ध कम्पनियों में आम निवेशकों को कम से कम 10 फीसदी हिस्सेदारी देनी होगी।
सेबी के आदेश के मुताबिक निजी कम्पनियों के संस्थापकों को 30 जून 2013 तक अपनी हिस्सेदारी घटानी होगी, जबकि सरकारी कम्पनियों को 31 अगस्त तक सेबी के आदेश पालन करना होगा।
वर्ष 2014 में सरकारी कम्पनियों के विनिवेश के सरकारी लक्ष्य से भी शेयरों की बिकवाली को हवा मिलेगी। सरकार ने सार्वजनिक कम्पनियों में अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से वर्तमान कारोबारी वर्ष में 40 हजार करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने निजी कम्पनियों में भी अपनी हिस्सेदारी के विनिवेश से 14 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है।
संसद में बजट सत्र का दूसरा हिस्सा चालू है। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा या मतदान हो सकता है। इन विधेयकों में शामिल हैं फॉरवर्ड कंट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एमेंडमेंट विधेयक-2010, पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी विधेयक-2011, भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापना विधेयक-2011, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा विधेयक 2011 और बीमा कानून (संशोधन) विधेयक-2008। सत्र 10 मई को समाप्त होगा।
पांच मई 2013 को कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनाव भी बाजार को कुछ हद तक प्रभावित कर सकते हैं। चुनाव का परिणाम आठ मई को घोषित होगा।
लोकसभा चुनाव से जुड़ी खबरों के चलते अगले साल मई तक शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने के आसार हैं। माना जा रहा है कि अगली सरकार कई पार्टियों की मिली जुली हो सकती है। सुधार की प्रक्रिया के अवरुद्ध होने की आशंका है। इसका असर वित्तीय घाटा प्रबंधन पर नकारात्मक रूप से पड़ सकता है और वैश्विक रेटिंग एजेंसियां भारत की रेटिंग घटा सकती हैं।
बाजार में इस वक्त काफी गिरावट चल रहा है इसे देखते हुए निवेशक बॉटम अप की रणनीति अपना सकते हैं। यानी वे सस्ते शेयर खरीद सकते हैं। छोटे निवेशकों को इस दौरान सेक्टर कॉल लेने के बजाय खास-खास शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।