यह ख़बर 14 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

सितंबर में मामूली कम हुई सकल मुद्रास्फीति

खास बातें

  • विशेषज्ञों के अनुसार मुद्रास्फीति की इस स्थिति को देखते हुए नहीं लगता है कि रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति के रुख में कोई बदलाव लाएगा।
New Delhi:

सितंबर महीने में सकल मुद्रास्फीति में मामूली गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, यह अभी भी दहाई अंक के आसपास बनी हुई है। मुद्रास्फीति में पिछले महीने की तुलना में गिरावट के बावजूद खाद्य उत्पाद, ईंधन और विनिर्मित उत्पादों सहित कई वस्तुओं के दाम बढ़े हैं। विशेषज्ञों के अनुसार मुद्रास्फीति की इस स्थिति को देखते हुए नहीं लगता है कि रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति के रुख में कोई बदलाव लाएगा। थोकमूल्य सूचकांक पर आधारित सकल मुद्रास्फीति सितंबर 2011 में 9.72 प्रतिशत रही है, पिछले महीने अगस्त में यह 9.78 प्रतिशत रही थी। हालांकि, एक साल पहले सितंबर 2010 में यह 8.98 फीसदी रही थी। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़े के मुताबिक इस साल जून की समग्र मुद्रास्फीति का संशोधित आंकड़ा 9.36 फीसदी रहा, जबकि अस्थाई आंकड़ा 9.22 फीसदी था। समीक्षाधीन महीने के दौरान खाद्य उत्पाद सालाना स्तर पर 9.23 फीसदी मंहगे हुए। प्याज की कीमत 23.58 फीसदी बढ़ी, जबकि फल 15.98 फीसदी मंहगे हैं और आलू 14.64 फीसदी मंहगे रहे। सितंबर 2011 में एक साल पहले की तुलना में सब्जियों के दाम 14.04 फीसदी ऊंचे रहे। प्राथमिक उत्पाद समूह की मुद्रास्फीति सितंबर में 11.84 फीसदी रही। इस समूह का सकल थोक मूल्य सूचकांक में 20 फीसदी योगदान हैं, जबकि अगस्त में महीने इस समूह की मंहगाई दर 12.58 फीसदी रही थी। विनिर्मित उत्पादों की कीमत सितंबर में सालाना स्तर पर 7.69 फीसदी बढ़ी, जबकि अगस्त में यह 7.79 फीसदी बढ़े थे। थोक मूल्य सूचकांक में इसका इस समूह की हिस्सेदारी 65 फीसदी है। विनिर्मित उत्पादों की मंहगाई दर इस साल फरवरी से लगातार बढ़ रही है, जब इसने छह फीसदी का स्तर पार किया था।


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