खास बातें
- यूनान और फ्रांस के चुनाव परिणामों के बाद यूरो क्षेत्र को लेकर उभरी नई चिंताओं से डॉलर की सतत मांग चलने अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 72 पैसे की गिरावट के साथ 53.84 रुपये प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
मुंबई: यूनान और फ्रांस के चुनाव परिणामों के बाद यूरो क्षेत्र को लेकर उभरी नई चिंताओं से डॉलर की सतत मांग चलने अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 72 पैसे की गिरावट के साथ 53.84 रुपये प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
बाजार सूत्रों ने कहा कि पूंजी के भारी बाह्य प्रवाह के संकेतों से भी रुपये की धारणा प्रभावित हुई। उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए सप्ताहांत तक रुपये के 54 रुपये प्रति डॉलर के स्तर से भी नीचे चले जाने की आशंका है।
ऐसा समझा जाता है कि रिजर्व बैंक ने रुपये के 53.80 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक गिरने के समय हस्तक्षेप किया था लेकिन वह गिरावट को रोकने में नाकामयाब रहा।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 53.54 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर नीचा खुला और कारोबार के दौरान 53.85 रुपये प्रति डॉलर तक दिन के निचले स्तर तक चला गया। अंत में यह 72 पैसे की गिरावट के साथ 53.84 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। इससे पूर्व 14 दिसंबर 2011 को रुपया 53.71 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक नीचे गया था।
इंडसइंड बैंक के वैश्विक बाजार समूह प्रमुख जे मोसेस हार्डिग ने कहा कि रुपये की गिरावट के तीन कारण थे। पहला अन्य मुद्राओं विशेषकर यूरो की तुलना में डॉलर में मजबूती आना था और दूसरा कमजोर शेयर बाजार ने रुपये की गिरावट में योगदान किया। कापरेरेशन बैंक के (ट्रेजरी) जीएम पी राजाराम कारंत ने कहा कि अगर डॉलर के मुकाबले यूरो में गिरावट जारी रहती है तो सप्ताहांत तक रुपया 54 रुपये प्रति डॉलर के स्तर को लांघ कर नीचे गिर सकता है।
बंबई शेयर बाजार का सूचकांक आज 66.60 अंक अथवा 0.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। इस बीच भारतीय रिजर्व बैंक ने डॉलर का संदर्भ दर 53.4600 रुपये प्रति डॉलर और 69.4005 रुपये प्रति यूरो निर्धारित किया है। पौंड, यूरो और जापानी येन के मुकाबले रुपये में गिरावट देखने को मिली।