यह ख़बर 04 जुलाई, 2013 को प्रकाशित हुई थी

रुपये की अस्थिरता कम करने का प्रयास करेगा आरबीआई

खास बातें

  • सुब्बाराव ने कहा कि बैंक की मौद्रिक नीति हस्तांतरण तेज नहीं है, क्योंकि वाणिज्यिक बैंक ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों को देने में हिचक दिखा रहे हैं और बैंकिंग लाइसेंस के हर आवेदक को एक लाइसेंस नहीं मिल सकता है।
चेन्नई:

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर डी सुब्बाराव ने गुरुवार को कहा कि आरबीआई का रुपये के स्तर को लेकर कोई लक्ष्य नहीं है, वह रुपये में स्थिरता लाने के लिए हर संसाधन का उपयोग करेगा।

उन्होंने कहा कि बैंक की मौद्रिक नीति हस्तांतरण तेज नहीं है, क्योंकि वाणिज्यिक बैंक ब्याज दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों को देने में हिचक दिखा रहे हैं और बैंकिंग लाइसेंस के हर आवेदक को एक लाइसेंस नहीं मिल सकता है।

बैंक की बोर्ड बैठक के बाद सुब्बाराव ने संवाददाताओं से कहा कि बैंक को रुपये की विनिमय दर को लेकर कोई लक्ष्य नहीं है, बल्कि वह अपने हर उपकरण का उपयोग कर रुपये में जारी उतार-चढ़ाव को कम करने की कोशिश करेगा।

हाल ही में रुपया डॉलर के मुकाबले 60 से अधिक के निचले स्तर पर पहुंच गया था।

उन्होंने कहा, "मैं बैंक की स्थापित नीति से अधिक कुछ नहीं कह सकता हूं। हम उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए अपने पास उपलब्ध उपकरणों का उपयोग करते हैं। हमारे पास विनिमय दर या लक्ष्य की योजना नहीं है, हम सभी उपकरणों का उपयोग कर मुद्रा की अस्थिरता को नियंत्रित करने की कोशिश करते हैं।"

बैंकिंग लाइसेंस आवेदनों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि नए बैंक को लेकर कोई निश्चित संख्या तय नहीं है और प्रत्येक आवेदक को एक-एक लाइसेंस मिल भी नहीं सकता है।

आदित्य बिड़ला नूवो के लाइसेंस की दौर में शामिल होने और उसके अध्यक्ष कुमारमंगलम बिड़ला के आरबीआई के बोर्ड में होने के कारण हितों के संभावित टकराव को लेकर पूछे गए सवाल पर सुब्बाराव ने कहा कि बैंकिंग लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाना एक नई घटना है और बिड़ला बोर्ड में पिछले छह वर्षों से हैं।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सरकार से विचार विमर्श किया जाएगा।

सुब्बाराव ने कहा कि आरबीआई अगले तीन से चार महीने में आवेदनों का मूल्यांकन करेगा और उसके बाद दूसरी समिति इनका अध्ययन करेगी और इन पर फैसला लेगी।

उन्होंने गैर-निष्पिादित परिसंपत्तियों को लेकर चिंता का इजहार करते हुए कहा कि प्रत्येक बैंक में समुचित पूंजी का निवेश किया गया है।

केंद्रीय वित्तमंत्री पी चिदम्बरम की यह धारणा कि आरबीआई को महंगाई पर नियंत्रण करने के अलावा आर्थिक विकास और रोजगार सृजन पर भी ध्यान देना चाहिए, के बारे में पूछने पर सुब्बाराव ने कहा कि आरबीआई वित्तीय स्थिरता और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए हर संभव उपाय कर रही है।

भ्रष्टाचारयुक्त वित्तीय योजना पर उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं पर लगाम कसना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने हालांकि कहा कि आरबीआई यह अध्ययन करेगा कि आखिर क्यों गांव वाले ऐसी योजनाओं के प्रलोभन में फंस जाते हैं।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अध्ययन के लिए बैंक ने तमिलनाडु के दो जिलों का चुनाव किया गया है। इसके बाद सही कदम उठाया जा सकता है।

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जाली मुद्राओं पर उन्होंने कहा कि बैंकों को उनकी पहचान कर रिपोर्ट दर्ज करनी चाहिए और आम लोगों को ऐसे नोट जमा करने चाहिए।