यह ख़बर 30 जुलाई, 2013 को प्रकाशित हुई थी

खाद्य सुरक्षा योजना से वृद्धि, मुद्रास्फीति पर बनेगा दबाव : आरबीआई

खास बातें

  • रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा कि संप्रग सरकार के खाद्य सुरक्षा कानून के कई ‘आर्थिक परिणाम’ हैं जिनमें राजकोषीय घाटे, आर्थिक वृद्धि दर व मुद्रास्फीति पर दबाव शामिल हैं।
मुंबई:

रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा कि संप्रग सरकार के खाद्य सुरक्षा कानून के कई ‘आर्थिक परिणाम’ हैं जिनमें राजकोषीय घाटे, आर्थिक वृद्धि दर व मुद्रास्फीति पर दबाव शामिल हैं।

मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद सुब्बाराव ने कहा, ‘खाद्य सुरक्षा विधेयक के कई आर्थिक परिणाम सामने आने वाले हैं जिसका हम आरबीआई में आगे अध्ययन करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘अनाज खरीज पर दबाव होगा, सब्सिडी पर दबाव होगा, राजकोषीय घाटे पर दबाव होगा जिसका आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति पर असर होगा। साथ ही इसका खाद्य सुरक्षा के लाभार्थियों को होने वाली अधिशेष आय पर असर होगा कि वे कैसे इसे खर्च करेंगे और मुद्रास्फीति पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।’ हालांकि, उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक विधेयक के प्रस्तावों का अभी अध्ययन कर रहा है।

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उल्लेखनीय है कि इस महीने की शुरुआत में केंद्रीय कैबिनेट ने अध्यादेश के जरिए खाद्य सुरक्षा विधेयक को लागू करने का निर्णय किया। इस विधेयक का लक्ष्य देश की दो तिहाई आबादी को हर महीने एक से तीन रुपये किलो के भाव पर पांच किलो अनाज उपलब्ध कराना है।