खास बातें
- कारपोरेट क्षेत्र के लिए बैंकिंग का दरवाजा खोलते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को बैंकों को नया लाइसेंस जारी करने के लिए अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए।
मुंबई: कारपोरेट क्षेत्र के लिए बैंकिंग का दरवाजा खोलते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को बैंकों को नया लाइसेंस जारी करने के लिए अंतिम दिशा-निर्देश जारी किए।
अंतिम दिशा-निर्देश के मुताबिक बैंक खोलने के लिए 500 करोड़ की न्यूतम पूंजी की दरकार होगी। नए बैंकों में विदेशी भागीदारी 49 फीसदी तक हो सकेगी।
आरबीआई ने कहा है, "निजी क्षेत्र की निकाय/समूह, सार्वजनिक क्षेत्र की निकाय और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां नान-ऑपरेटिव फाइनॉनसियल होल्डिंग कंपनी (एनओएफएचसी) के जरिए बैंक स्थापित कर सकेंगी।"
केंद्रीय बैंक ने कहा है कि नए बैंकों के लाइसेंस के लिए आवेदन देने वाले निकाय का विगत का रिकॉर्ड साफ-सुथरा होना चाहिए। 10 वर्ष की सफलता का रिकार्ड होने के साथ ही उसे वित्तीय रूप से दुरुस्त होना चाहिए।
एंजल ब्रोकिंग के सीएमडी दिनेश ठक्कर ने कहा, "यह बैंकिंग सेक्टर के लिए खेल बदलने वाली घटना है। प्रथमदृष्टया कारपोरेट को अनुमति दे दी गई है, मैं आशा करता हूं कि कम से कम 8-10 खिलाड़ी इस सेक्टर में पूरी ताकत के साथ उतरेंगे।"
नए बैंकों को अपनी कम से कम 25 शाखाओं को वैसे देहाती केंद्रों में खोलनी होगी जहां कोई बैंक नहीं है और जहां की आबादी 10,000 से कम है।
नए बैंकों के लाइसेंस के लिए 1 जुलाई 2013 तक आरबीआई में आवेदन दिया जा सकता है।
पहले चरण में आवेदनों को आरबीआई द्वारा छानबीन की जाएगी। इसके बाद उसे उच्च स्तरीय सलाहकार समिति के पास भेजा जाएगा। इस समिति के गठन की घोषणा जल्दी ही की जाएगी।
समिति अपनी सिफारिश आरबीआई को सौंपेगी। सिद्धांतत: बैंक स्थापित करने की मंजूरी आरबीआई द्वारा दी जाएगी। आरबीआई द्वारा दी गई मंजूरी की वैधता एक वर्ष होगी।
एसोचैम ने दिशा-निर्देश का स्वागत करते हुए कहा कि नये बैंकों के प्रवेश से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। अंतिम रूप से इसका लाभ उपभोक्ताओं को मिलेगा।