IT सेवाओं की आउटसोर्सिंग पर बैंकों और NBFCs के लिए बदलेंगे नियम, RBI ने जारी किया नया मानदंड

बैंकों, भुगतान बैंकों, सहकारी बैंकों, ऋण सूचना कंपनियों, एनबीएफसी और अन्य विनियमित संस्थाओं को एक व्यापक रूप से अनुमोदित आईटी आउटसोर्सिंग नीति को लागू करना होता है.

IT सेवाओं की आउटसोर्सिंग पर बैंकों और NBFCs के लिए बदलेंगे नियम, RBI ने जारी किया नया मानदंड

RBI ने IT सेवाओं की आउटसोर्सिंग पर नया मानदंड जारी किया. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मुंबई:

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गुरुवार को बैंकों और अन्य विनियमित संस्थाओं द्वारा आईटी सेवाओं की आउटसोर्सिंग को लेकर संबंधित मानदंड का प्रस्ताव किया. इन मानदंडों का मकसद वित्तीय, परिचालन और साख संबंधी जोखिमों का प्रबंधन करना है. सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सेवाओं की आउटसोर्सिंग पर आरबीआई के मसौदे के अनुसार विनियमित संस्थाओं (आरई) को आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं की आउटसोर्सिंग के लिए केंद्रीय बैंक से पूर्व मंजूरी की जरूरत नहीं होगी.

केंद्रीय बैंक ने कहा कि नियमित संस्थाएं अपने बिजनेस मॉडल को सपोर्ट करने के लिए व्यापक स्तर पर आईटी और आईटी-इनेबल्ड सेवाओं का इस्तेमाल करती हैं, वहीं अपने काम के एक बड़े हिस्से को लेकर वो तीसरी पार्टी पर निर्भर करती हैं, ऐसे में वो जोखिमों का शिकार होने की आशंका में रहती हैं.

मसौदे में कहा गया है, ‘‘इन निर्देशों का अंतर्निहित सिद्धांत यह है कि आरई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आउटसोर्सिंग व्यवस्था ग्राहकों के लिए उसके दायित्वों को पूरा करने की क्षमता को कम न करे और न ही पर्यवेक्षण प्राधिकरण द्वारा प्रभावी निरीक्षण को बाधित करे.''

आरबीआई ने इस मसौदे पर हितधारकों से 22 जुलाई तक सुझाव मांगे हैं. 

बैंकों, भुगतान बैंकों, सहकारी बैंकों, ऋण सूचना कंपनियों, एनबीएफसी और अन्य विनियमित संस्थाओं को एक व्यापक रूप से अनुमोदित आईटी आउटसोर्सिंग नीति को लागू करना होता है.

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बैंकिंग और गैर-बैंकिंग संस्थाओं के लिए एक और खबर

आरबीआई ने इस हफ्ते क्रेडिट एवं डेबिट कार्ड जारी करने वाले बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों को ग्राहकों की सहमति के बगैर कार्ड सक्रिय करने जैसे कुछ मानदंडों का पालन करने की समयसीमा तीन महीने के लिए बढ़ा दी है. बैंकों और एनबीएफसी को एक जुलाई से 'क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड- जारी करना और संचालन निर्देश, 2022' पर आरबीआई का मास्टर निर्देश लागू करना था.

बैंकिंग उद्योग से मिले प्रतिवेदनों को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने एक परिपत्र में कहा कि इस मास्टर निर्देश के कुछ प्रावधानों के कार्यान्वयन की समयसीमा को एक अक्टूबर, 2022 तक बढ़ाने का निर्णय किया गया है.

जिन प्रावधानों के अनुपालन में मोहलत दी गई हैं उनमें क्रेडिट कार्ड को सक्रिय करने से संबंधित प्रावधान भी शामिल है. मास्टर निर्देश के अनुसार, अगर कार्ड जारी होने के 30 दिनों बाद भी उसे सक्रिय नहीं किया गया है तो जारीकर्ता संस्थान को क्रेडिट कार्ड सक्रिय करने के लिए कार्डधारक से वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) आधारित सहमति लेनी होगी.

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यदि कार्ड को सक्रिय करने के लिए ग्राहक से सहमति नहीं मिलती है तो कार्ड जारीकर्ता को ग्राहक से पुष्टि प्राप्त करने की तारीख से सात कार्य दिवसों के भीतर ग्राहक को बिना किसी लागत के क्रेडिट कार्ड खाता बंद कर देना चाहिए.

इसके अलावा, कार्ड जारीकर्ताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि कार्डधारक से स्पष्ट सहमति प्राप्त किए बिना कार्डधारक को स्वीकृत और सलाह दी गई क्रेडिट सीमा का उल्लंघन किसी भी समय नहीं किया गया है. इस मामले में भी अब एक अक्टूबर तक का समय दिया गया है.

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