यह ख़बर 05 मई, 2012 को प्रकाशित हुई थी

विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने को रिजर्व बैंक ने बढ़ाईं ब्याज दरें

खास बातें

  • रुपये में गिरावट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा में प्रवासी भारतीयों के जमा खाते में जमा पर ब्याज दर सीमा को बढ़ाकर तीन प्रतिशत कर दिया।
नई दिल्ली:

रुपये में गिरावट के मद्देनजर विदेशी मुद्रा प्रवाह आकर्षित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा में प्रवासी भारतीयों के जमा खाते में जमा पर ब्याज दर सीमा को बढ़ाकर तीन प्रतिशत कर दिया।

रिजर्व बैंक की इस घोषणा के बाद बैंक अब विदेशी मुद्रा में एनआरआई जमा पर ज्यादा ब्याज दर की पेशकश कर सकेंगे। एक अन्य अधिसूचना में रिजर्व बैंक ने निर्यात वित्त पर ब्याज दरों को नियंत्रणमुक्त कर दिया। इससे निर्यातक विदेशी मुद्रा में धन आसानी से जुटा सकेंगे और ब्याज पर किसी तरह की सीमा का बंधन नहीं होगा।

केंद्रीय बैंक ने यह कदम रुपये में आ रही गिरावट को थामने के लिए उठाया। रुपया आज 53.47 प्रति डॉलर पर बंद हुआ।

इस संबंध में जारी सूचना में रिजर्व बैंक ने कहा, ‘विदेशी मुद्रा प्रवासी भारतीय खाता यानी एफसीएनआर (बी) जमा खाते में ब्याज दर की अधिकतम सीमा को 1.25 प्रतिशत से बढ़ाकर दो प्रतिशत किया गया है। यह ब्याज दर लंदन इंटरबैंक दर (लिबर) अथवा स्वैप दर के उपर एक से तीन साल की जमा पर और तीन से पांच साल की जमा पर तीन प्रतिशत होगी।’

एक अन्य अधिसूचना में रिजर्व बैंक ने कहा है कि विदेशी मुद्रा में निर्यात ऋण पर बैंक ब्याज दरें स्वयं तय कर सकते हैं। यह व्यवस्था 5 मई 2012 से लागू होगी।’ इससे निर्यात ऋण पर ब्याज दरों को नियंत्रणमुक्त कर दिया गया है।

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इसके अलावा माना जा रहा है कि डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये को थामने के लिए रिजर्व बैंक ने हस्तक्षेप भी किया।