नई दिल्ली: NDTV से खास बातचीत में आरबीआई मुखिया रघुराम राजन ने कहा कि वह अपने पद से संबंधित नीतियों को लेकर जायज़ आलोचना का स्वागत करते हैं, लेकिन व्यक्तिगत आरोपों को अहमियत नहीं देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने दूसरे कार्यकाल को लेकर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे, और उनका कहना है कि वह विचारों के दायरे में ही रहना पसंद करते हैं, और ऐसा उनके भाषणों से साफ हो जाता है।
राजन की दोबारा नियुक्ति की संभावना की दुनिया भर में चर्चाएं
गौरतलब है कि राजन का आरबीआई के गवर्नर के रूप में तीन साल का कार्यकाल सितंबर में खत्म हो रहा है और उनकी दोबारा नियुक्ति की संभावना की दुनिया भर में चर्चाएं हैं। उनके दूसरे कार्यकाल को लेकर ब्रिटेन के यूरोपियन यूनियन में शामिल होने के लिए प्रयुक्त शब्द 'ब्रेक्जिट' की तर्ज पर 'रेक्जिट' शब्द की चर्चा जोरों पर है, जो देश-विदेश में उनके प्रति आदर को ही दर्शाता है। दूसरी ओर बीजेपी सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने पीएम नरेंद्र मोदी को दो पत्र लिखकर अपील की थी कि राजन को दूसरा कार्यकाल नहीं दिया जाए, क्योंकि "उनके काम से भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान" पहुंचा है और "वह मानसिक तौर पर भारतीय नहीं हैं..."
हर आदमी के लिए अपने देश के प्रति सम्मान दिखाने का अलग तरीका होता है
NDTV से राजन ने कहा, "कुछ आरोप मूल रूप से इतने गलत होते हैं कि उनके बारे में कुछ कहना उनको वह अहमियत दे देता है, जिसके वे काबिल नहीं होते..." ग्रीनकार्डधारी होने की वजह से उनकी भारतीयता पर उठे पर सवाल पर उन्होंने कहा कि भारतीयता और देश के लिए प्यार एक जटिल विषय है। हर एक आदमी के लिए अपने देश के प्रति सम्मान दिखाने का अलग-अलग तरीका होता है। "मेरी सास कहेंगी कि कर्मयोग ही सही तरीका है, अपना काम करते जाओ..."
वित्तमंत्री अरुण जेटली और उनके मजबूत संबंध हैं
वित्त मंत्रालय के कुछ अधिकारियों सहित आलोचकों के एक समूह ने आरोप लगाया है कि उन्होंने मुद्रास्फीति को काबू में करने के लिए ब्याज दर घटाने से इनकार कर दिया था, लेकिन राजन ने कहा कि वित्तमंत्री अरुण जेटली और उनके मजबूत संबंध हैं। "आपको हैरानी हो सकती है कि मेरे और जेटली के बीच कभी कोई गंभीर असहमति नहीं हुई..." गौरतलब है कि पीएम नरेंद्र मोदी राजन को आरबीआई में रखे जाने के पक्ष में बताए जाते हैं, जबकि हाल ही में उन्होंने वॉल स्ट्रीट जनरल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि सितंबर से पहले कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।
उम्मीद के बावजूद ब्याज दरों में नहीं किया कोई परिवर्तन
मंगलवार को ही राजन ने ब्याज दरों में कोई परिवर्तन नहीं किया था, जबकि नीति समीक्षा के दौरान उनसे परिवर्तन की अपेक्षा की जा रही थी। उन्होंने कहा, "बहुत से लोग आजकल अखबारों में मेरा विदाई पत्र लिख रहे हैं... इस बहाने, इस पर ध्यान देने का समय मिल जाता है कि क्या करना बाकी है..." पिछले हफ्ते ही कोलकाता के अख़बार ने कहा था कि राजन ने पीएम मोदी से कहा था कि वह अपना कार्यकाल आगे नहीं बढ़वाना चाहते और शिकागो यूनिवर्सिटी वापस जाना चाहेंगे। हालांकि राज्यों द्वारा संचालित बैंकों के कर्ज कम करने और देनदारों पर बकाया लोन चुकाने को लेकर दवाब बनाने के लिए उनकी तारीफ भी हुई है।
काफी नाम है राजन का दुनिया भर में उनकी योग्यताओं को लेकर
राजन का अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री के तौर पर और 2007-08 में वैश्विक वित्त संकट आने की सटीक भविष्यवाणी करने की वजह से खासी साख है। एक अर्थशास्त्री के तौर पर उनके लेख काफी सराहे जाते हैं और उन्हें अर्थशास्त्री रॉकस्टार की पदवी भी दी गई है। भारतीय वित्तीय संसार के कार्टूनों में उन्हें जेम्स बांड के तौर पर भी पेश किया जा चुका है। यह पूछे जाने पर कि वह आरोपों से कैसे निपटते है, उन्होंने कहा कि आपके बच्चे आपको ईमानदार बनाए रखते हैं, आपका मजाक भी उड़ाते हैं, और मेरी पत्नी ने मुझे हमेशा पूरा सहयोग और समर्थन दिया है।