यह ख़बर 26 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

आरबीआई ने की प्रमुख दरों में 0.50% की बढ़ोतरी

खास बातें

  • भारतीय रिजर्व बैंक ने अड़ियल महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए अपनी अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दरों में प्रतिशत 0.50 अंक की वृद्धि कर दी
नई दिल्ली:

भारतीय रिजर्व बैंक ने अड़ियल महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए अपना रुख और कड़ा करते हुए अपनी अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दरों में प्रतिशत 0.50 अंक की वृद्धि कर दी जो बाजार की उम्मीदों से ऊंची है। बैंकों के शीर्ष अधिकारियों ने केंद्रीय बैंक की इस तिमाही नीतिगत घोषणा से पहले कहा था कि उन्हें ऊंची मुद्रास्फीति को देखते हुए रेपो के नाम से चर्चित उस दर में प्रतिशत 0.25 अंक की वृद्धि की उम्मीद है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को नकदी की फौरी जरूरत के लिए अल्पकालिक उधार देता है। रिजर्व बैंक द्वारा महत्वपूर्ण नीतिगत ब्याज दरों में वृद्धि से बैंकों के लिए कारोबार की लागत बढ़ेगी और इससे आवास, कार और कारपोरेट सभी तरह के बैंक ऋण और महंगे होने का अनुमान है। रिजर्व बैंक द्वारा पिछले तीन माह में यह ब्याज दरों में तीसरी वृद्धि है। मार्च, 2010 से केंद्रीय बैंक नीतिगत दरों में 11 बार बढ़ोतरी कर चुका है। रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के अंत तक अपनी महंगाई दर के अनुमान को भी बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। पूर्व में केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष के अंत तक मुद्रास्फीति के 6 प्रतिशत के स्तर पर रहने का अनुमान लगाया था।  इस ताजा वृद्धि के बाद लघु अवधि की ऋण दर रेपो रेट 7.50 से बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई है। वहीं इसके साथ ही वाणिज्यिक बैंकों को उनकी लघु अवधि की जमा पर दी जाने वाली ब्याज दर (रिवर्स रेपो रेट) 6.50 प्रतिशत से 7 प्रतिशत हो गई है। केंद्रीय बैंक ने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को 6 प्रतिशत पर कायम रखा है। रिजर्व बैंक के गवर्नर डी सुब्बाराव ने मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा की घोषणा करते हुए कहा, कुछ गिरावट के बावजूद अब भी भी मुद्रास्फीति का तगड़ा दबाव स्पष्ट है। वृहद आर्थिक परिप्रेक्ष्य में महंगाई सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। इसके आधार पर रेपो दर को तत्काल प्रभाव से आधा प्रतिशत बढ़ाकर 8 प्रतिशत कर दिया गया है। महंगाई की दर इस समय 9 प्रतिशत से ऊपर चल रही है। केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में आधा प्रतिशत की बढ़ोतरी उम्मीद के विपरीत है। माना जा रहा था कि रिजर्व बैंक ब्याज दरों में चौथाई फीसद की ही वृद्धि करेगा। ब्याज दरों में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद बंबई शेयर बाजार के सेंसेक्स में 300 अंक की जोरदार गिरावट आई और यह 18,570 अंक के स्तर पर आ गया।  भारतीय रिजर्व बैंक ने इस तथ्य को स्वीकार किया है कि मांग तथा मध्यम अवधि में मुद्रास्फीतिकारी संभावनाओं पर अंकुश के लिए उसने पूर्व में जो फैसले किए हैं उससे निकट भविष्य में आर्थिक वृद्धि दर प्रभावित होगी। बैंकरों का कहना है कि केन्द्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दरों में की गई वृद्धि का असर निश्चित रूप से ब्याज दरों पर पड़ेगा। ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के कार्यकारी निदेशक एससी सिन्हा ने कहा, यह वृद्धि उम्मीद से कहीं अधिक है। इससे कर्ज आधा प्रतिशत तक महंगा हो जाएगा। रिजर्व बैंक ने 3 मई को मौद्रिक नीति की सालाना समीक्षा में नीतिगत दरों में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि की थी। इसके बाद जून में मध्य तिमाही समीक्षा में ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की और वृद्धि की गई। केन्द्रीय बैंक ने महंगाई की दर के अपने अनुमान को बढ़ाकर 6 से 7 प्रतिशत कर दिया है। सुब्बाराव ने कहा कि इस रुख में बदलाव महंगाई की स्थिति पर निर्भर करेगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले केंद्रीय बैंक महंगाई दर के अपने अनुमान को लेकर आलोचना झेल चुका है। यही वजह है कि रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिये महंगाई के अनुमान को संशोधित कर इसके मार्च, 2012 तक 7 फीसद रहने का नया अनुमान व्यक्त किया है। इससे पहले इसके छह प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। रिजर्व बैंक ने हालांकि, वृद्धि दर में कमी की बात को स्वीकार किया है, पर उसने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि दर के 8 प्रतिशत के अनुमान में बदलाव नहीं किया है। सुब्बाराव ने हालांकि संकेत दिया कि वैश्विक स्तर पर जिंसों के दाम, अनिश्चित वृहद आर्थिक वातावरण और ईंधन का सब्सिडी बिल बढ़ने से राजकोषीय घाटे को 4.6 प्रतिशत पर रखने में केंद्र की अक्षमता जैसे कारणों से वृद्धि दर के नीचे आने का जोखिम बना हुआ है।


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