खास बातें
- चालू खाते में घाटा होने का अर्थ होता है कि देश से वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात इनके आयात से कम हो रहा है।
मुंबई: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी रंगराजन ने आर्थिक वृद्धि को ऊंचा बनाए रखने के लिए मुद्रास्फीति पर अंकुश के साथ साथ चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पाद के 2.5 प्रतिशत के अंदर सीतिम रखने पर बल दिया है। चालू खाते में घाटा होने का अर्थ होता है कि देश से वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात इनके आयात से कम हो रहा है। दृश्य और अदृश्य मदों के निर्यात में जितनी कमी रहेगी चालू खाते के घाटे का अनुपात उतना ही ऊंचा होगा। चालू वित्त वर्ष की प्रथम छमाही में चालू खाते का घाटा :सीएडी: 3.7 प्रतिशत रहा। रंगराजन ने कल रात यहां महाराष्ट्र आर्थिक शिखर सम्मेलन में कहा, चालू वित्त वर्ष की प्रथम छमाही में चालू खाते का घाटा बढ़ कर 3.7 प्रतिशत तक पहुंच गया। लेकिन 50 अरब डॉलर से भी अधिक के अच्छे खासे विदेश पूंजी प्रवाह के कारण कोई समस्या नहीं हुई। पर हम इतने ऊंचे सीएडी के साथ 9 प्रतिशत वाषिर्क अर्थिक वृद्धि रख को बनाए रखने की उम्मीद नहीं कर सकते। हमें इसे अगले वित्त वर्ष में 2.5 प्रतिशत या उससे नीचे लाना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि वस्तुओं के निर्यात में अप्रत्याशित रूप से तेजी की बदौलत व्यापार घाटा सीमित रखने में मदद मिली है। पर यदि सेवा क्षेत्र का निर्यात भी उसी गति से बढा होता तो कुल मिला कर चालू खाते का घाटा काफी कम हो सकता था। रंगराजन का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में सीएडी 3 प्रतिशत तक सीमित रहेगा। उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष में वस्तुओं का निर्यात सुधरा है और फरवरी में इसमें एक साल पहले की तुलना में करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है। रंगराजन ने कहा कि हमें निर्यात बढाने के लिए और मेहनत करने के साथ साथ आयात की जरूरत को भी कम करने का प्रयास करना चाहिए ताकि सीएडी को अगले वित्त वर्ष में 2.5 प्रतिशत तक सीमित रखा जा सके। रंगराजन ने देश की उच्च आर्थिक वृद्धि के मार्ग में संभावित रोड़ों के बारे में कहा कि उंचा राजकोषीय घाटा, उंचा सीएडी, कृषि क्षेत्र में निवेश की कमी और इसके कारण इस क्षेत्र में कम उत्पादकता तथा विश्व बाजार में जिंसों की कीमतों में जल्दी जल्दी होने वाला उछाल भारत की आर्थिक वृद्धि के लिए कठिनाई पैदा कर सकता है। रंगराजन ने मुद्रास्फीति को समस्या बताते हुए कहा कि खाद्य मुद्रास्फीति अब भी ऐसे स्तर पर जिसको लेकर सरकार और रिजर्व बैंक सहज नहीं रह सकते। उन्होंने कहा पिछले कुछ समय से कीमतों में कमी आ रही है पर मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाना रिजर्व बैंक और सरकार की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। पर उन्होंने यह भी कहा कि मार्च तक थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति सात प्रतिशत तक आ जाएगी। जनवरी में यह 8.23 प्रतिशत थी।