यह ख़बर 08 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'राजा की नीति गलत थी तो 2003 से स्पेक्ट्रम रद्द हों'

खास बातें

  • कंपनियों ने कहा कि यदि राजा के कार्यकाल में अपनाई गई पहले आओ पहले पाओ नीति अवैध थी, तो 2003 से सभी स्पेक्ट्रम आवंटन रद्द होने चाहिए।
नई दिल्ली:

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में लाभ पाने के लिए संदेह के घेरे में आई दूरसंचार कंपनियों ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि यदि पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के कार्यकाल में अपनाई गई पहले आओ पहले पाओ की नीति अवैध थी, तो 2003 से स्पेक्ट्रम के सभी आवंटन रद्द किए जाने चाहिए। दूरसंचार कंपनियों में इस मसले पर मतभेद मुखर होकर सामने आ रहा है। एतिसलात डीबी टेलीकाम के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि सरकार ने कभी भी 2जी स्पेक्ट्रम के लिए नीलामी की नीति का पालन नहीं किया और 2003 के बाद से कई कंपनियों को बिना किसी शुल्क के अतिरिक्त स्पेक्ट्रम मिला है। साल्वे ने जीएस सिंघवी तथा एके गांगुली की पीठ के समक्ष कहा, यदि यह आवंटन रद्द करने का आधार है, तो ऐसे में 2003 के बाद से सभी अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के आवंटन को रद्द किया जाना चाहिए। साल्वे ने कहा कि सरकार ने 2003 के बाद से स्थापित कंपनियों को अतिरिक्त स्पेक्ट्रम दिया है। दूरसंचार विभाग ने उस समय अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के लिए शुल्क वसूलने के ट्राई के सुझाव को नजरअंदाज किया था। उन्होंने बताया, दूरसंचार नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने कहा है कि ट्राई की सिफारिशों को नजरअंदाज किए जाने से सरकार को 36,993 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। साल्वे ने कहा, नीलामी के बिना आवंटित सभी स्पेक्ट्रम रद्द किया जाए और फिर उसकी नीलामी की जाए। सेवाप्रदाताओं से भेदभाव नहीं किया जा सकता।


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