रेल मंत्री सुरेश प्रभु (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
रेलवे में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के मकसद से रेल मंत्रालय सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) का नियंत्रण अपने हाथों में लेना चाहता है, लेकिन उसे कुछ राज्यों की ओर से विरोध का सामना करना पड़ रहा है।
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने सदस्यों के सवालों के जवाब में बताया कि यात्रियों और उनके साजो-सामान की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रेलवे ने कई कदम उठाए हैं।
उन्होंने इसी क्रम में बताया कि जीआरपी और रेलवे संरक्षा बल (आरपीएफ) के एकीकरण के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को अपनी मंशा से अवगत कराते हुए पत्र लिखा था, जिसमें इच्छा जताई गई थी कि केंद्र जीआरपी का संचालन नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहता है।
प्रभु ने बताया कि 17 राज्यों ने इस योजना का विरोध किया है, जबकि कुछ राज्यों ने इसका समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि इस समय जीआरपी राज्य सरकारों के नियंत्रण में आता है, जबकि रेलवे जीआरपी कर्मियों के वेतन पर आने वाले खर्च में से 50 फीसदी राशि देता है। आरपीएफ रेल मंत्रालय के तहत आता है।
ट्रेनों में महिलाओं की सुरक्षा के संबंध में बीजेपी की पूनम महाजन के सवाल के जवाब में प्रभु ने बताया कि 1056 कर्मियों की कुल क्षमता के साथ आठ 'महिला वाहिनी' के गठन को मंजूरी दी गई है, ताकि महिलाओं के लिए रेल सफर को सुरक्षित सुनिश्चित किया जा सके।
ट्रेनों में महिलाओं और बच्चों के उत्पीड़न के मामलों के संबंध में उन्होंने बताया कि इस वर्ष अक्टूबर तक ऐसे 245 मामले सामने आए। वर्ष 2011 में ऐसे 106 मामले सामने आए थे, जो वर्ष 2012 में बढ़कर 165 और वर्ष 2013 में 242 हो गए।