यह ख़बर 26 दिसंबर, 2014 को प्रकाशित हुई थी

बीमा और कोयला अध्यादेश पर राष्ट्रपति की मुहर

नई दिल्ली:

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने बीमा और कोयला क्षेत्र से जुड़े दो अध्यादेशों पर आज हस्ताक्षर कर दिए। इससे बीमा क्षेत्र में अतिरिक्त विदेशी निवेश आकर्षित करने और रद्द कोयला खानों के फिर से आबंटन करने का रास्ता साफ हो गया है।

राष्ट्रपति भवन के प्रेस सचिव वेणु राजामनी ने कहा कि राष्ट्रपति ने दोनों अध्यादेशों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

सरकार ने इन दोनों क्षेत्रों में नए सुधारवादी उपायों को लागू करने के लिए ये दोनों अध्यादेश लाने का फैसला किया था, क्योंकि पिछले दिनों संपन्न संसद के शीतकालीन सत्र में संबंधित विधेयकों पर चर्चा नहीं करायी जा सकी।

संसद का शीतकालीन सत्र समाप्त होने के एक दिन बाद ही मंत्रिमंडल ने बुधवार को बीमा क्षेत्र पर अध्यादेश लाने तथा कोयला अध्यादेश को फिर से जारी करने को मंजूरी दे दी।

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने उम्मीद जतायी थी कि बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश सीमा बढ़ाकर 49 फीसदी करने से देश में 6 से 8 अरब डॉलर का अतिरिक्त पूंजी प्रवाह होगा। वर्तमान में यह सीमा 26 फीसदी है। यह संशोधन विधेयक 2008 से लंबित है।

उन्होंने कहा था, 'अध्यादेश सुधारों को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे निवेशकों सहित दुनिया को यह संदेश भी जाता है कि देश लंबे समय तक इंतजार नहीं कर सकता भले ही संसद का एक सदन एजेंडे पर काम शुरू करने में अनिश्चितकाल तक प्रतीक्षा करे।'

राज्यसभा की प्रवर समिति की मंजूरी के बावजूद बीमा कानून संशोधन विधेयक, 2008 पर सदन में चर्चा नहीं हो पाईं। धर्मांतरण और अन्य मुद्दों पर विपक्ष द्वारा लगातार सदन की कार्यवाही बाधित किये जाने से ऐसा हुआ।

कोयला खान (विशेष प्रावधान) विधेयक, 2014 को लोकसभा ने मंजूरी दे दी, लेकिन उच्च सदन में इस पर चर्चा नहीं हो पायी।

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कोयला क्षेत्र पर अध्यादेश फिर से जारी होने पर निजी कंपनियों को उनके स्वयं के इस्तेमाल के लिए कोयला खानों की ई-नीलामी हो सकेगी तथा राज्य एवं केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों को सीधे खानों का आबंटन किया जा सकेगा।