केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को पेश आम बजट में आयकर छूट की सीमा बढ़ाकर लोगों को प्रतिवर्ष दो हजार रुपये की बचत करने का मौका दिया है तो दूसरी तरफ सेवा कर में दो प्रतिशत की वृद्धि कर आम से खास सभी वर्ग के लोगों की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है। कई अन्य वस्तुओं को उत्पाद एवं सीमा शुल्क के दायरे में लाए जाने से उनका महंगा होना तय है।
लोकसभा में शुक्रवार को अपना सातवां बजट पेश करते हुए मुखर्जी ने व्यक्तिगत आयकर छूट की सीमा 1,80,000 रुपये से बढ़ाकर 2,00,000 रुपये कर दी, लेकिन एक तरह से सभी सेवाओं को कर दायरे में लाते हुए और सेवा कर को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करते हुए उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि पहले की बनिस्बत अब अधिक अप्रत्यक्ष कर देने होंगे।
इस तरह उनके प्रस्तावों का शुद्ध असर यह है कि जहां प्रत्यक्ष कर राहत के कारण 4,500 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान होगा, वहीं अप्रत्यक्ष कर उपायों से 45,940 करोड़ रुपये का शुद्ध राजस्व हासिल होगा। यानी सरकार आपको एक रुपये की राहत देकर आपसे 10 रुपये वसूलेगी।
होटल में खाना खाने, सोने के जेवरात खरीदने, महंगी कारें खरीदने और धूम्रपान के लिए अब अधिक भुगतान करने होंगे, जबकि सिनेमा हाल में फिल्म देखने, इक्विटी में निवेश करने, स्वास्थ्य जांच कराने, कुछ जीवन रक्षक दवाइयों की खरीद व बच्चों की शिक्षा में राहत मिलेगी।
मुखर्जी द्वारा घोषित नए कर स्तरों के तहत 2,00,000 रुपये तक की आय पूरी तरह करमुक्त होगी, 2,00,000 रुपये से 5,00,000 रुपये तक की आय पर 10 प्रतिशत कर लगेगा और उसके बाद 5,00,000 रुपये से 10,00,000 रुपये तक की आय पर 20 प्रतिशत तथा 10,00,000 से ऊपर की आमदनी पर 30 प्रतिशत कर लगेगा।
बहरहाल, कुल 14,90,925 करोड़ रुपये (300 अरब डॉलर) के बजट में राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 5.1 प्रतिशत आका गया है, जो चालू वित्त वर्ष के 5.9 प्रतिशत से कम है।
मुखर्जी ने कहा कि चूंकि अर्थव्यवस्था वापस पटरी पर लौट रही है, लिहाजा अब कुछ कठोर कदम उठाने का समय आ गया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस बयान का समर्थन किया और कहा कि खासतौर से सब्सिडी में कटौती जैसी कड़वी चीजों को स्वीकार करना होगा।
सब्सिडी को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के दो फीसदी से कम के स्तर पर लाने के प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री ने कहा, "जब कठोर निर्णय लेने का समय आता है, तो हम आशा करते हैं हम अपने सभी सहयोगियों को साथ लाने में सक्षम होंगे।"
मुखर्जी ने कहा कि कारपोरेट क्षेत्र के लिए यद्यपि कर दरें अपरिवर्तित हैं, लेकिन उन्होंने इस क्षेत्र के विस्तार के लिए धन की आसान उपलब्धता का भरोसा दिलाया। भले ही उन्होंने खास वस्तुओं पर उत्पाद शुल्क दरें और सीमा शुल्क बढ़ा दी।
मुखर्जी ने कहा कि वह 17 मदों को छोड़कर बाकी प्रत्येक सेवा के लिए कर का प्रस्ताव करते हैं, और इसके साथ ही उन्होंने सेवा कर को मौजूदा 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया। इस तरह सेवा कर के जरिए 1,24,000 करोड़ रुपये की आमदनी होगी, जबकि चालू वित्त वर्ष में सेवा कर से ताजा अनुमानित आमदनी 95,000 करोड़ रुपये है।
मुखर्जी ने सुबह ठीक 11 बजे अपना भाषण शुरू किया और उसे 110 मिनट में पूरा किया। इस दौरान उन्होंने सामाजिक कल्याण की योजनाओं व उद्योगों को लाभ पहुंचाने से लेकर राजकोषीय समेकन व क्षेत्र केंद्रित सुधारों जैसे कई प्रस्ताव गिनाए।
पूंजी बाजार को और उदार बनाने का आश्वासन देते हुए मुखर्जी ने एक नई इक्विटी बचत योजना घोषित की, जिसके तहत इक्विटी में 50,000 रुपये के निवेश पर 50 फीसदी की आयकर छूट मिलेगी। इसके लिए वार्षिक आमदनी 10 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
मुखर्जी ने अपने भाषण की शुरुआत देश पर वैश्विक मंदी के कुप्रभाव से की, परंतु उन्होंने लोगों को आश्वस्त किया कि सुधार के स्पष्ट संकेत हैं और 2012-13 में देश की विकास दर मौजूदा वित्त वर्ष के 6.9 प्रतिशत के मुकाबले 7.6 प्रतिशत होगी।
मुखर्जी ने कहा, "वैश्विक आर्थिक संकट ने हमें प्रभावित किया है। देश के जीडीपी की विकास दर 2011-12 के दौरान 6.9 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि पिछले दो वर्ष से 8.4 फीसदी थी।"
मुखर्जी ने कहा, "यद्यपि अर्थव्यवस्था पर मंदी के कुप्रभावों को कम करने में हम सक्षम रहे हैं, लेकिन इस वर्ष का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। फिर भी भारत अन्य देशों की तुलना में आर्थिक विकास के मामले में अग्रिम पंक्ति के देशों में खड़ा है।"
रक्षा, स्वास्थ्य एवं शिक्षा का क्षेत्र में भारती वृद्धि की गई है। रक्षा क्षेत्र के लिए बजट में 17 फीसदी वृद्धि कर 193407 करोड़ रुपये कर दिया गया है जबकि शिक्षा का अधिकार कानून और सर्वशिक्षा अभियान के लिए बजट में 21 फीसदी वृद्धि करते हुए इसे 25,555 करोड़ कर दिया गया है। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के लिए बजट को बढ़ाकर 20,822 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
मुखर्जी ने कहा कि चूंकि 12वीं पंचवर्षीय योजना पहली अप्रैल से शुरू हो रही है, लिहाजा उनकी सरकार पांच प्रमुख क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी।
-घरेलू मांग बढ़ाने वाली नीतियां बनाना।
- निजी निवेश में तीव्र वृद्धि सुनिश्चित करना।
- कृषि, ऊर्जा, यातायात, कोयला, विद्युत और राष्ट्रीय राजमार्गो के विकास के लिए बाधाएं दूर करना।
- कुपोषण से निपटना।
- निर्णयों के क्रियान्वयन, सेवा आपूर्ति एवं पारदर्शिता के साथ अच्छा प्रशासन और भ्रष्टाचार एवं कालेधन पर अंकुश लगाने के उपाय करना।