यह ख़बर 08 फ़रवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

सब्सिडी के बोझ ने मेरी नींद उड़ा दी है : प्रणब

खास बातें

  • वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने बढ़ते सब्सिडी बोझ पर एक बार फिर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उनकी रातों की नींद उड़ने लगी है।
नई दिल्ली:

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने बढ़ते सब्सिडी बोझ पर एक बार फिर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे उनकी रातों की नींद उड़ने लगी है। चालू वित्तवर्ष के दौरान खाद्यान्न, उर्वरक और ईंधन की खुदरा बिक्री पर सरकारी सहायता बजट अनुमान से एक लाख करोड़ रुपये अधिक हो जोने की आशंका व्यक्त की जा रही है। बजट में 1,43,000 करोड़ रुपये सब्सिडी का अनुमान है, जबकि वर्ष की समाप्ति तक इसमें एक लाख रुपये वृद्धि का अनुमान है।

प्रणब ने कहा, ‘‘वित्तमंत्री के तौर पर जब मैं विभिन्न मदों में दी जाने वाली भारी सब्सिडी के बारे में सोचता हूं, तो मेरी नींद उड़ जाती है। इसमें कोई शक नहीं।’’ मुखर्जी लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली और भंडारण पर आयोजित राज्यों के कृषि और खाद्य मंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। दो दिवसीय सम्मेलन प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून को अमल में लाने के बारे में राज्यों के साथ विचार-विमर्श के लिए बुलाया गया है।

माना जा रहा है कि प्रस्तावित खाद्य सुरक्षा कानून के अमल में आने के बाद जहां एक तरफ खाद्यान्न की आपूर्ति बढ़ाने की जरूरत होगी, वहीं दूसरी तरफ सरकार का सब्सिडी बोझ भी बढ़ेगा। राशन व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा की बात करते करते वित्तमंत्री का ध्यान अचानक सब्सिडी बोझ की तरफ चला गया।

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वित्तमंत्री 16 मार्च को 2012-13 का आम बजट पेश करेंगे। वित्तमंत्री ऐसे माहौल में यह बजट लाएंगे, जब दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता छाई है। देश की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार भी धीमी पड़ी है और राजस्व प्राप्ति तथा खर्च के बीच अंतर बढ़ रहा है। इस साल राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.6 प्रतिशत रहने का बजट अनुमन है, लेकिन माना जा रहा है कि यह एक प्रतिशत बढ़कर 5.6 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। पेट्रोलियम सब्सिडी के साथ उर्वरक और खाद्यान्न सब्सिडी भी लगातार बढ़ रही है।