यह ख़बर 22 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

वैश्विक उथल-पुथल से भारत प्रभावित : मुखर्जी

खास बातें

  • मुखर्जी ने कहा कि वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल का भारतीय अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है लेकिन निकट भविष्य में देश के लिए अच्छे संकेत हैं।
नई दिल्ली:

केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को कहा कि वैश्विक आर्थिक उथल पुथल का भारतीय अर्थव्यवस्था पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है लेकिन निकट भविष्य में देश के लिए अच्छे संकेत हैं। राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की 56वीं बैठक को सम्बोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा, "भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ती जा रही है। यह गर्व का विषय है कि आज विश्व भारत को विकास का प्रमुख खिलाड़ी मानता है।" उन्होंने कहा, "लेकिन वैश्वीकरण के कुछ अपने नुकसान हैं। जब विश्व प्रभावित होता है तो इससे भारत पर भी प्रभाव पड़ेगा। यूरोपीय कर्ज संकट एवं अमेरिका में धीमी विकास दर से भारत पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।" भारत का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) विकास दर वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में 7.7 फीसदी थी। मुखर्जी ने कहा, "वर्तमान वित्तीय वर्ष में विकास दर में थोड़ी गिरावट हो सकती है। अर्थव्यवस्था के बुनियादी तत्व मजबूत होने के कारण निकट भविष्य सकारात्मक है।" बारहवीं पंचवर्षीय योजना पर चर्चा करते मुखर्जी ने कहा कि इस दौरान औसतन नौ फीसदी विकास दर निर्धारित करना बेहतर होगा। केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा, "इस योजना अवधि के दौरान औसतन नौ फीसदी विकास दर निर्धारित करना उचित है।" उन्होंने मुख्यमंत्रियों से राज्यों में निवेश के बेहतर वातावरण बनाने का आह्वान किया ताकि देश बारहवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान आधारभूत संरचना में 10 खरब डॉलर के निवेश के लक्ष्य को पा सके। मुखर्जी ने कहा, "नये सिरे से निवेश (ग्रीनफील्ड) एवं पुरानी परियोजनाओं में निवेश (ब्राउनफील्ड) के मामले में भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और पुनर्वास सम्बंधी मामलों पर ध्यान देने की जरूरत है। हमारा ध्यान निवेश को प्रोत्साहित करने पर केंद्रीय होना चाहिए।" उन्होंने राज्यों से राजकोषीय घाटा घटाने एवं कृषि एवं कर आदि क्षेत्रों में सुधार लाने के लिए कहा।


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