खास बातें
- केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि पेट्रोल की ताजा मूल्य वृद्धि में सरकार ने कोई भूमिका नहीं निभाई है, क्योंकि कीमतें नियंत्रण मुक्त हो चुकी हैं।
कोलकाता: केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने रविवार को कहा कि पेट्रोल की ताजा मूल्य वृद्धि में सरकार ने कोई भूमिका नहीं निभाई है, क्योंकि कीमतें नियंत्रण मुक्त हो चुकी हैं। मुखर्जी ने एक तरह से तेल विपणन कम्पनियों के निर्णय का पक्ष लेते हुए कहा कि पिछले 11 महीनों में कच्चे तेल की कीमत 42 डॉलर प्रति बैरल बढ़ गई हैं। मुखर्जी ने यहां मीडियाकर्मियों को बताया, "पिछले वर्ष जून में हमने पेट्रोल कीमतों को नियंत्रण मुक्त करने का निर्णय लिया था। लिहाजा इन दिनों पेट्रोल कीमतों में वृद्धि या कमी का निर्णय सरकार द्वारा नहीं लिया जाता। यह निर्णय तेल विपणन कम्पनियों द्वारा लिया गया है।" अब तक की सर्वाधिक वृद्धि के तहत शनिवार आधी रात से पेट्रोल कीमतों में पांच रुपये प्रति लीटर की दर से वृद्धि कर दी गई है। यह वृद्धि आठ प्रतिशत से भी अधिक है। मुखर्जी ने कहा कि जब पिछले जून में कीमतों को नियंत्रणमुक्त करने का निर्णय लिया गया था, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 68 डॉलर प्रति बैरल थी। "लेकिन आज यह दर बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल हो गई है।" डीजल, रसोई गैस और किरोसिन की कीमतों में सम्भावित वृद्धि के बारे में मुखर्जी ने कहा, "मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता कि ईंधन कीमतों के लिए अधिकार प्राप्त मंत्रियों का समूह क्या निर्णय लेगा।" मुखर्जी इस मंत्री समूह के अध्यक्ष हैं, जिसकी बैठक अगले सप्ताह होने वाली है। बैठक में कीमतों में वृद्धि के एक प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। मुखर्जी ने कहा कि सरकार एक लाख करोड़ रुपये तेल सब्सिडी के रूप में दे रही है। ज्ञात हो कि पिछले नौ महीनों में पेट्रोल की कीमत में नौ बार वृद्धि की गई और इस तरह पेट्रोल की कीमत 47.93 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 63.37 रुपये हो गई है।