खास बातें
- सरकार का इरादा देश के डाकघरों को बैकों में बदलने का है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाई जा सकें।
नई दिल्ली: सरकार का इरादा देश के डाकघरों को बैकों में बदलने का है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाई जा सकें। देश में 1.5 लाख डाकघर हैं। सरकार डाकघरों को बैंकों में बदलने के लिए जल्द बैंकिंग नियामक भारतीय रिजर्व बैंक से संपर्क करेगी। दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल डाकघरों के जरिए गांवों में आमलोगों तक अत्याधुनिक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाना चाहते हैं। सिब्बल ने कहा, हम डाक विभाग का व्यावसायीकरण चाहते हैं। हम सभी डाकघरों को बैंकों में बदलने के लिए रिजर्व बैंक से लाइसेंस मांगेगे। देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाओं के अभाव तथा ग्रामीणों की अपनी रिण की जरूरत के लिए महाजन जैसे अनौपचारिक क्षेत्र पर निर्भरता को देखते हुए सरकार ने डाकघरों को बैंकों में बदलने का लक्ष्य बनाया है। सिब्बल ने कहा, भारतीय स्टेट बैंक देशभर में सभी जगह शाखाएं नहीं खोल सकता। डाकघर देशभर में हैं। उनकी शाखाएं पहले से हैं इसलिए बुनियादी ढांचे पर खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। ऐसे में हम कम लागत पर बैंकिंग सुविधाएं दे सकते हैं, जो लोगों के लिए काफी लाभकारी होंगी। डाक विभाग फिलहाल कई वित्तीय सेवाएं मसलन डाकघर बचत बैंक, पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस, पेंशन भुगतान और धन स्थानांतरण सुविधा देता है। डाक विभाग की आमदनी 2010-11 के वित्त वर्ष में 11 प्रतिशत बढ़कर 6,954.09 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 6,266.70 करोड़ रुपये थी। हालांकि कुछ सर्किलों में नकारात्मक वृद्धि दर की वजह से विभाग का घाटा वित्त वर्ष के दौरान 6,625 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यह लगभग सालाना आमदनी के बराबर है। डाक विभाग के कुल 22 सर्किलों में छत्तीसगढ़ की वृद्धि दर नकारात्मक 19 प्रतिशत रही। इसी तरह झारखंड में 18 प्रतिशत नकारात्मक वृद्धि दर रही। पूर्वोत्तर के डाकघरों की वृद्धि दर नकारात्मक 15.9 प्रतिशत रही। वहीं दूसरी ओर असम की वृद्धि दर सकारात्मक 23.7 प्रतिशत, हरियाणा की 19.5 प्रतिशत, कर्नाटक की 13.5 प्रतिशत और तमिलनाडु की 13.9 प्रतिशत रही।