खास बातें
- कम्पनी की 12 अरब डॉलर की लागत वाली परियोजना के लिए अधिकारी शनिवार से भूमि अधिग्रहण का काम शुरू करने वाले हैं।
भुवनेश्वर: द. अफ्रीका की प्रमुख इस्पात कम्पनी पॉस्को के प्रस्तावित संयंत्र के खिलाफ विरोध शुक्रवार को तेज हो गया। कम्पनी की 12 अरब डॉलर की लागत वाली परियोजना के लिए अधिकारी शनिवार से भूमि अधिग्रहण का काम शुरू करने वाले हैं। संयंत्र के लिए प्रस्तावित भूमि तक अधिकारियों को जाने से रोकने के लिए महिलाओं एवं बच्चों सहित ग्रामीणों ने तटीय जगतसिंहपुर जिले के गोविंदपुर गांव में अपना प्रदर्शन जारी रखा। पॉस्को विरोधी एक आंदोलनकारी ने कहा, "प्रस्तावित संयंत्र के विरोध में 2000 से अधिक ग्रामीणों ने एक मानव श्रृंखला बनाई।" उन्होंने कहा कि सरकार जब तक इस इलाके से परियोजना को वापस नहीं ले लेती तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे ग्रामीणों से जबरन भूमि का अधिग्रहण कर रहे हैं। ज्ञात हो कि परियोजना के खिलाफ हो रहे आंदोलन को राजनीतिक पार्टियों ने अपना समर्थन दिया है। इससे आंदोलन का और बल मिल गया है। जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में और परियोजना के खिलाफ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), फॉरवर्ड ब्लॉक, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), समाजवादी पार्टी (सपा) एवं एकता परिषद के सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को भुवनेश्वर में प्रदर्शन किया। वहीं, राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टियों कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी कहा है कि वास्तविक हालात का पता लगाने के लिए वे अपने वरिष्ठ नेताओं को इलाके में भेजेंगी। परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का काम इससे पहले स्थानीय त्योहार के कारण चार दिन के लिए रोका गया था। अपर जिलाधिकारी एसके चौधरी ने कहा, "हम आज (शुक्रवार) से जमीन अधिग्रहण का काम शुरू करने के लिए तैयार थे लेकिन बारिश के कारण यह रोकना पड़ा।" उन्होंने कहा, "यदि मौसम ठीक रहा तो हम यह काम कल (शनिवार) से शुरू करेंगे।" पॉस्को की योजना यहां 12 लाख टन स्टील उत्पादन क्षमता का संयंत्र लगाने की है। यह स्थान पाराद्वीप बंदरगाह से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित है।