खास बातें
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में लगातार वृद्धि के कारण देश में आने वाले महीने में पेट्रोल के दाम बढ़ सकते हैं।
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में लगातार वृद्धि के कारण देश में आने वाले महीने में पेट्रोल के दाम बढ़ सकते हैं।
सरकारी तेल कंपनियां विधानसभा चुनावों के दौरान पेट्रोल के दाम की समीक्षा न होने के चलते हुए नुकसान की भरपाई की भी छूट चाहती हैं। सबसे बड़ी खुदरा पेट्रोलियम कंपनी इंडियन ऑयल कापरेरेशन के चेयरमैन आरएस बुटोला ने कहा ‘अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल के दाम तेजी से बढ़े हैं। पेट्रोल का दाम 109 से बढकर 128 डालर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। दाम यदि इसी तेजी से बढ़ते रहे तो कंपनी को पेट्रोल के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं।’
कंपनी को पेट्रोल की बिक्री पर नुकसान बढ कर 443 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। एक दिसंबर 2011 के बाद से पेट्रोल के दाम में बदलाव नहीं किया गया। उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में जारी विधानसभा चुनावों की वजह से कंपनियों ने पेट्रोल के दाम नहीं बढ़ाये।
विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल के दाम बढ़ाने के बारे में पूछे गये सवाल पर बुटोला ने कहा ‘ऐसी स्थिति को चुनाव विशेष से नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के परिपेक्ष में देखा जाना चाहिये। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव, ग्रीस का आर्थिक संकट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोलियम पदार्थों के दाम लगातार उच्चस्तर पर बने हुए हैं। दाम यदि आगे भी बढ़ते रहते हैं तो हमें भी पेट्रोल के दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं।’
उन्होंने कहा ‘हम पहली दिसंबर के बाद से पेट्रोल के दाम नहीं बढा सके हैं। इसलिये हमने सरकार से इस दौरान हुए नुकसान की नकद भरपाई किये जाने का आग्रह किया है।’ हालांकि, इंडियन आयल के प्रमुख ने यह स्पष्ट किया कि सरकार ने पेट्रोल के दाम बढ़ाने अथवा घटाने के बारे में तेल कंपनियों को किसी तरह के कोई निर्देश नहीं दिये थे।