यह ख़बर 18 जनवरी, 2012 को प्रकाशित हुई थी

उप्र की चीनी मिलों को बकाया भुगतान करने का निर्देश

खास बातें

  • उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश चीनी मिलों को 2006-07 तथा 2007-08 सत्र के गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान करने का निर्देश दिया।
नई दिल्ली:

उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश चीनी मिलों को 2006-07 तथा 2007-08 सत्र के गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान करने का निर्देश दिया।

उद्योग जगत के अनुमान के अनुसार न्यायालय के आदेश के बाद मिलों को 1,200 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करना होगा।

उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश के तहत उत्तर प्रदेश चीनी मिलों को राज्य सरकार द्वारा 2006-07 तथा 2007-08 के सत्र (अक्टूबर-सितंबर) के लिए निर्धारित मूल्य से 7 से 15 रुपये प्रति क्विंटल कम का भुगतान करना है। उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग के एक अधिकारी ने कहा कि न्यायालय ने 2006-07 तथा 2007-08 सत्र के लिए मिलों को तीन महीने के भीतर बकाये का भुगतान करने को कहा है। उसने यह भी कहा कि न्यायालय ने पांच सदस्यीय संविधान पीठ के 2004 के उस निर्णय को सात सदस्यीय न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के समक्ष भेजा है जिसमें राज्य सरकार के परामर्श मूल्य तय करने के अधिकार को उचित ठहराया गया था।

इस बारे में पूछे जाने पर भारतीय चीनी मिलों के संगठन इस्मा के महानिदेशक अविनाश वर्मा ने कहा, ‘उच्चतम न्यायालय के निर्णय का उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर नकारात्मक असर पड़ेगा। आदेश के कारण मिलों को किसानों को बकाये के रूप में 1,200 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करना पड़ेगा।
सूत्रों के मुताबिक चीनी बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी बजाज हिंदुस्तान को बकाये के रूप में 250 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।

उत्तर प्रदेश चीनी मिल एसोसिएशन ने राज्य सरकार के खिलाफ 2003-04 में याचिका दायर की थी।

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वर्ष 2006-07 तथा 2007-08 के लिये परामर्श मूल्य 125 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था।