यह ख़बर 13 मई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

तेल कंपनियों को 20,000 करोड़ की सब्सिडी

खास बातें

  • सरकार ने तेल कंपनियों को पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 20,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकद सब्सिडी को मंजूरी दी है।
New Delhi:

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को वर्ष 2010-11 के दौरान पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 20,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त नकद सब्सिडी को मंजूरी दी है। तेल मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि इसके साथ ही सरकार ने तेल कंपनियों को 2010-11 के लिए कुल मिलाकर 40,912 करोड़ रुपये की सब्सिडी दे दी है। अधिकारी ने बताया, वित्त मंत्रालय ने इंडियन ऑयल को 11,027 करोड़ रुपये, भारत पेट्रोलियम को 4,595 करोड़ रुपये तथा हिंदुस्तान पेट्रोलियम को 4,379 करोड़ रुपये की नकदी क्षतिपूर्ति देने संबंधी पत्र जारी किया। इससे पहले दो किस्तों में इन खुदरा कंपनियों को 20,911 करोड़ रुपये दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक कंपनियां डीजल, रसोई गैस, केरोसीन उनकी लागत से कम कीमत पर बेच रही हैं। इसके अलावा तेल खोज और उत्पादन क्षेत्र की कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) भी करीब 25,750 करोड़ रुपये का योगदान करेगी। इसके बाद तेल कंपनियों को 11,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान स्वयं ही झेलना होगा। मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि तेल कंपनियां 30,000 करोड़ रुपये की नकद सब्सिडी दिये जाने की मांग कर रही थी, लेकिन वित्तमंत्रालय उन्हें 20,001 करोड़ रुपये की सहायता ही उपलब्ध कराई है। तेल कंपनियां मौजूदा खुदरा कीमतों पर डीजल की बिक्री करने में 18.19 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठा रही हैं। राशन में दिए जाने वाले मिट्टी तेल पर 29.69 रुपये प्रति लीटर और घरों में दिए जाने वाले एलपीजी सिलेंडर पर 329.73 रुपये प्रति सिलेंडर का नुकसान उठा रही हैं। पेट्रोल के दाम हालांकि पिछले साल जून में नियंत्रण मुक्त कर दिए गए थे, लेकिन जनवरी से इसमें भी कोई वृद्धि नहीं की गई।


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