खास बातें
- ट्राई ने कहा है कि लाइसेंस रद्द होने से उपभोक्ताओं पर ज्यादा असर नहीं होगा, क्योंकि करीब 95 फीसदी उपभोक्ता उन कंपनियों के हैं, जिन्हें जनवरी, 2008 से पहले लाइसेंस मिले हैं।
नई दिल्ली: दूरसंचार नियामक ट्राई ने कहा है कि आठ कंपनियों को दिए गए 2जी के 122 लाइसेंस रद्द किए जाने से उपभोक्ताओं पर ज्यादा असर नहीं होगा, क्योंकि करीब 95 फीसदी उपभोक्ता उन कंपनियों के हैं, जिन्हें जनवरी, 2008 से पहले लाइसेंस मिले हैं।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकार (ट्राई) के अध्यक्ष जेएस सरमा ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘सुप्रीम कोर्ट का फैसला लागू किया जाएगा। उपभोक्ता लाइसेंस रद्द होने से उपभोक्ता प्रभावित नहीं होंगे, क्योंकि 95 फीसदी बाजार हिस्सेदारी उन कंपनियों के पास है, जिन्हें जनवरी, 2008 से पहले लाइसेंस मिला है।’’ उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के पास मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी (एमएनपी) के जरिए अपने नंबर का उपयोग किसी और कंपनी की सेवा लेने के लिए कर सकते हैं।
सरमा ने कहा, ‘‘उपभोक्ताओं के पास एमएनपी के जरिए उसी नंबर की अन्य कंपनी की सेवा लेने का विकल्प है। हम परिचालकों को निर्देश देंगे कि वे अपने उपभोक्ताओं को सूचना दें और विज्ञापन निकालें।’’ स्पेक्ट्रम की ऊंची कीमत की आशंका के कारण शुल्क बढ़ोतरी के बारे में सरमा ने कहा कि ट्राई इस बारे में सचेत है और वह स्थिति पर निगाह रखेगा।
जिन कंपनियों का लाइसेंस रद्द हुआ है, उनमें यूनिनॉर (यूनिटेक और टेलीनॉर का संयुक्त उद्यम), लूप टेलीकॉम, सिस्तेमा श्याम (श्याम और रूस की सिस्तेमा का संयुक्त उद्यम), एतिसलात डीबी (स्वान और संयुक्त अरब अमीरात की एतिसलात का संयुक्त उद्यम), एस टेल, वीडियोकान, टाटा और आइडिया शामिल हैं। ये सभी लाइसेंस रद्द होने के बाद 500 मेगाहर्ट्ज का स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए उपलब्ध होगा।