नई दिल्ली:
पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) विनोद राय ने कहा है कि उन्हें 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन पर अपनी रपट को लेकर कोई खेद नहीं है। रपट में इस आवंटन से सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपये के नुकसान होने का अनुमान लगाया गया था।
उन्होंने सोमवार को कहा, मुझे आंकड़े पर कोई खेद नहीं है क्योंकि बाजार गतिशील है। उस समय आपूर्ति एवं मांग के हिसाब से कीमत लगाई गई थी। राय से पूछा गया था कि क्या वे 2-जी स्पेक्ट्रम आवंटन पर अपनी रपट का समर्थन करते हैं।
यह रपट 2010 में संसद में पेश हुई और इससे राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया। इसके चलते उच्चतम न्यायालय ने फरवरी 2012 में 122 लाइसेंस रद्द कर दिए।
एक टीवा से बातचीत में राय ने कहा कि आंकड़े 'परिवर्तनशील' हैं और समय के साथ बदल सकते हैं।
उन्होंने कहा, हो सकता है कि 1.76 लाख करोड़ रपये का आंकड़ा 2014 में सही नहीं हो। 2001 का आंकड़ा, जिसे 2008 में ब्रिकी के लिए लिया गया, सही नहीं था और यह बात विभाग को किसी और ने नहीं बल्कि वित्तमंत्री और प्रधानमंत्री ने कही। राय ने कहा कि आंकड़े समय विशेष के हालात पर निर्भर करते हैं। हो सकता है कि तीन साल बाद 1.76 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा बहुत छोटा लगे।
कोयला खान आवंटन पर कैग की रपट से जुड़े सवाल के जवाब में राय ने कहा कि 2005 में 57 खानें आवंटित की गई थीं जिनमें से 56 में खनन शुरू नहीं हुआ। यह इस बात का संकेत है कि उद्देश्य पूरा नहीं हुआ।