यह ख़बर 21 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

भारतीय वित्तीय संस्थानों की रेटिंग घटाने की कोई वजह नहीं : सचिव

खास बातें

  • वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच द्वारा 12 भारतीय वित्तीय संस्थानों का साख परिदृश्य घटाने के एक दिन बाद सरकार ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई की कोई वजह नहीं थी।
नई दिल्ली:

वैश्विक रेटिंग एजेंसी फिच द्वारा 12 भारतीय वित्तीय संस्थानों का साख परिदृश्य घटाने के एक दिन बाद सरकार ने गुरुवार को कहा कि इस तरह की कार्रवाई की कोई वजह नहीं थी।

वित्तीय सेवाओं के सचिव डीके मित्तल ने ऐसोचैम के एक सम्मेलन के अवसर पर कहा ‘‘हमें कोई वजह नजर नहीं आती कि भारतीय बैंकों की रेटिंग क्यों घटाई जाए। रेटिंग एजेंसियों द्वारा साख घटाने की कोई वजह नहीं है।’’ उन्होंने कहा कि 2011-12 के सभी बैंकों के नतीजे आए और चेतावनी भर भी ऐसा कोई संकेत नहीं है।

फिच ने एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, पंजाब नैशनल बैंक समेत 12 वित्तीय एजेंसियों के भविष्य के साख परिदृश्य को स्थिर से घटाकर नकारात्मक कर दिया। इससे कुछ दिनों पहले रेटिंग एजेंसी ने भारत के वित्तीय साख परिदृश्य को भी स्थिर से घटाकर नकारात्मक कर दिया था।

रेटिंग एजेंसियों के भारत अथवा भारतीय वित्तीय संस्थानों के बारे में दृष्टिकोण में संशोधन से विदेश से रिण मिलना मंहगा हो सकता है। इससे सबसे पहले प्रभावित होने वाला बैंक एसबीआई होगा जिसने हाल ही में विदेशी बाजार से दो अरब डालर जुटाने की योजना की घोषणा की है।

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भारत की जिन वित्तीय संस्थानों और बैंकों की रेटिंग परिदृष्य को कम किया गया है उनमें छह सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हैं जबकि दो निजी क्षेत्र के बैंक हैं। बैंक ऑफ बडौदा, उसकी न्यूजीलैंड की इकाई बैंक ऑफ बडौदा न्यूजीलैंड, केनारा बैंक, आईडीबीआई बैंक और एक्सिस बैंक शामिल हैं। निर्यात आयात बैंक, हडको, आईडीएफसी और भारतीय रेल वित्त निगम भी इससे प्रभावित होंगे।