खास बातें
- देश में सुस्त पड़े बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जान डालने के लिए सरकार ने निवेश के लिए एक नई कैबिनेट कमेटी बनाई है, जिसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री करेंगे।
नई दिल्ली: देश में सुस्त पड़े बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में जान डालने के लिए सरकार ने निवेश के लिए एक नई कैबिनेट कमेटी बनाई है, जिसकी अध्यक्षता खुद प्रधानमंत्री करेंगे। यह कमेटी बड़ी योजनाओं को जल्द लागू करने का काम करेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह फैसला इस बात का सबूत है कि सरकार विकास से जुड़ी बुनियादी योजनाओं को लागू करने के लिए कितनी गंभीर है। गौरतलब है कि अड़चनों की वजह से सड़क, बिजली, कोयला और खनन से जुड़ी करीब दो लाख करोड़ की योजनाएं रुकी पड़ी हैं।
आर्थिक वृद्धि को गति देने और निवेश के रास्ते में आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए सरकार ने बड़ी परियोजनाओं को जल्द मंजूरी देने को लेकर मंत्रिमंडल की निवेश समिति गठित करने और औद्योगीकरण को बढ़ावा देने के लिये भूए अधिग्रहण विधेयक के मसौदे को भी मंजूरी दे दी है।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके साथ ही यूरिया क्षेत्र के लिए नई निवेश नीति को भी हरी झंडी दे दी। इस नीति में मौजूदा यूरिया कारखानों के विस्तार और नए उर्वरक संयंत्रों को लगाने के लिए उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में दिल्ली और मुंबई सहित शेष बचे चार सर्किलों में स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए आधार मूलय में 30 प्रतिशत कटौती के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई। सरकार के ये फैसले अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए पिछले कुछ महीनों में किये गए अनेक प्रयासों को और मजबूती देते हुए सामने आए हैं। निवेशकों के विश्वास को मजबूत करने के लिए सरकार ने पिछले दिनों कई कदम उठाए हैं।
केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद एक आधिकारिक सूत्र ने बताया, 1,000 करोड़ रुपये अथवा इससे अधिक की बड़ी परियोजनाओं के निवेश प्रस्ताव को मंजूरी देने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की निवेश संबंधी समिति के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है।
इस समय 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली करीब 100 निवेश परियोजनाएं लटकी पड़ी हैं। वित्तमत्री पी चिदंबरम ने सबसे पहले इस तरह के एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति के गठन का प्रस्ताव किया था। उन्होंने इसे राष्ट्रीय निवेश बोर्ड (एनआईबी) का नाम दिया था। मंत्रिमंडल ने हालांकि, इसके नाम को बदलते हुए इसे मंत्रिमंडल की निवेश मामलों की समिति नाम दिया है।
(इनपुट भाषा से भी)