खास बातें
- मार्च में आई तेजी के बाद अब शेयर बाजारों में कुछ मुनाफावसूली का दौर देखने को मिल सकता है। मार्च में सेंसेक्स 973.89 अंक मजबूत हुआ।
New Delhi: मार्च में आई तेजी के बाद अब शेयर बाजारों में कुछ मुनाफावसूली का दौर देखने को मिल सकता है। मार्च में बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 973.89 अंक मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अब निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं। शेयर बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों की आक्रामक लिवाली के साथ-साथ मजबूत वैश्विक संकेतों के बीच कारोबारियों की भारी सौदों की कमी को पूरा करने के लिए की गई लिवाली से बीते सप्ताह सेंसेक्स 604.75 अंक या 3.21 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,420.39 अंक पर पहुंच गया। सेंसेक्स में तेजी की मुख्य वजह एफआईआई द्वारा किया गया दो अरब डॉलर का निवेश था। मार्च में सेंसेक्स में कुल 973.89 अंक या 5.27 फीसदी की तेजी आई। 2 अप्रैल को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान रीयल्टी, टिकाऊ उपभोक्ता सामान और वाहन कंपनियों के शेयरों में जोरदार लिवाली हुई। लिवाली समर्थन से स्मॉल कैप, मिडकैप शेयरों में भी तेजी आई। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि मार्च में मजबूती के बाद अब शेयर बाजार में आगामी सप्ताहों में कुछ मुनाफावसूली का दौर देखने को मिल सकता है। पद्माक्षी फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के उपाध्यक्ष (अनुसंधान) आनंद कुशेलन ने कहा कि आगे चलकर बाजार में एकीकरण का दौर देखने को मिलेगा। हालांकि जिस तरह से बाजार पिछले सप्ताह आगे बढ़ा है, उसे देखते हुए आगे चलकर इसमें और तेजी देखने को मिल सकती है।हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई, कच्चे तेल के दाम और ब्याज दर अभी भी बाजार के लिए चिंता का कारण है। आईआईएफएल के अनुसंधान प्रमुख (भारतीय निजी ग्राहक) अमर अंबानी ने कहा कि आगे चलकर बाजार का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि एफआईआई का प्रवाह सकारात्मक बना रहता है या नहीं। विश्लेषकों का कहना है शेयर बाजारों में तेजी का मुख्य कारण एफआईआई की जोरदार सतत लिवाली है, जिन्होंने 22 मार्च से 31 मार्च के बीच 8,548.14 करोड़ रुपये का निवेश किया है। एफआईआई के भारी निवेश को देखते हुए कारोबारियों और खुदरा निवेशक भी अपने सौदों की कमी को पूरा करने लिवाली के मैदान में उतर आए। शेयर बाजार के सभी सूचकांकों में बीते सप्ताह 1.54 प्रतिशत से 7.15 प्रतिशत तक की तेजी आई। मार्च में डेरिवेटिव अनुबंध की समयसीमा 31 मार्च को समाप्त होने के बाद कारोबारियों की शार्ट कवरिंग से बाजार धारणा में मजबूती आई। कच्चे तेल के भाव हाल में ढाई वर्ष के उच्च स्तर से नीचे आने के कारण भी टिकाऊ उपभोक्ता माल, रीयल्टी, बैंकिंग और ऑटो खंड में ब्याज दर के प्रति संवेदनशील शेयरों को लिवाली का बेहतर समर्थन प्राप्त हुआ। सरकार द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों में ढील देने के फैसले के कारण भी बाजार में तेजी आई। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 171.80 अंकों की तेजी के साथ 5,826.05 अंक पर बंद हुआ। अब कंपनियों के नतीजों का सीजन भी शुरू होने वाला है। विश्लेषकों का कहना है कि प्रौद्योगिकी, बैंकिंग और वाहन क्षेत्र की कंपनियों के परिणाम अच्छे रहेंगे।