यह ख़बर 29 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

कौशिक बसु से नेता हो रहे हैं नाराज...!

खास बातें

  • वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु एक नए विवाद में फंस गए हैं। इस बार हंगामा उनके एक बयान को लेकर है।
दिल्ली:

वित्त मंत्रालय के मुख्य आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु एक नए विवाद में फंस गए हैं। इस बार हंगामा उनके एक बयान को लेकर है।

दिल्ली में एक कायर्क्रम में भाग लेने पहुंचे कौशिक बसु से जब यह पूछा गया कि आर्थिक सुधार की योजना को आगे बढ़ाने के लिए सरकार क्या कर रही है… तो उन्होंने जवाब दिया... 'हमें आर्थिक सुधार के कुछ प्रस्तावों पर आगे बढ़ना होगा लेकिन इसके रास्ते में सबसे बड़ा रोड़ा गठबंधन यूपीए से जुड़े राजनीतिक दल हैं। हमें इन दलों को आर्थिक सुधार के प्रस्तावों का समर्थन करने के लिए तैयार करना होगा।

कौशिक बसु का यह बयान यूपीए के समर्थक दलों को रास नहीं आया है।

समाजवादी पार्टी के नेता मोहन सिंह ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि कौशिक बसु देश का मनोबल गिराने के आदी हो चुके हैं। पीएम कोशिश करें कि कोई भी नौकरशाह अनाप−शनाप बयान न दें।

मोहन सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी आर्थिक सुधार के अलग−अलग प्रस्तावों के गुण−दोष को ध्यान में रखकर ही अपना समर्थन देने के बारे में फैसला करेगी और सपा आंख−मूंदकर यूपीए की नीतियों का समर्थन नहीं करेगी।

उधर, विपक्ष को एतराज़ कौशिक बसु के उस दावे को लेकर भी है जिसमें उन्होंने कहा था कि देश में आर्थिक हालात ठीक होने में कम से कम चार महीने अभी और लगेंगे।

बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार पिछले सात साल से हालात सुधरने का बार−बार दावा कर रही है लेकिन आम लोगों को अब तक कोई राहत नहीं मिली है जबकि सीपीआई सांसद डी राजा के मुताबिक यूपीए सरकार ऐसी आर्थिक नीतियों को लागू कर रही है जिससे आम लोगों को कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है।

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

कौशिक बसु के बयान पर नेता भले ही नाराज़ हों लेकिन यह कहना भी गलत नहीं होगा कि यूपीए-2 लंबे समय से लंबित आर्थिक सुधार के ऐजेंडे को आगे बढ़ाने में नाकाम साबित हुई है जिसपर विरोध न सिर्फ यूपीए के बाहर से है बल्कि यूपीए के अंदर से ममता के विरोध की वजह से भी सुधार के एजेंडे को आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है।