खास बातें
- कर विभाग के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि नागरिक उड्डयन क्षेत्र में एफडीआई की अनुमति के सरकार के फैसले से ऋण के बोझ से दबी एयरलाइन कंपनी से बकाया वसूली की एक छोटी-सी किरण जगी है।
नई दिल्ली: निजी क्षेत्र की किंगफिशर एयरलाइंस पर सेवाकर बकाया 60 करोड़ रुपये पर पहुंच चुका है। कर विभाग के एक शीर्ष अधिकारी का कहना है कि नागरिक उड्डयन क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की अनुमति के सरकार के फैसले से ऋण के बोझ से दबी एयरलाइन कंपनी से बकाया वसूली की एक छोटी-सी किरण जगी है।
किंगफिशर ने कहा है कि उसकी विदेशी एयरलाइंस कंपनियों के साथ एफडीआई लाने के मुद्दे पर बात चल रही है। इस कदम से किंगफिशर से वित्तीय संकट से बाहर निकलने की उम्मीद बंधी है।
मुंबई के सेवा कर आयुक्त सुशील सोलंकी ने कहा, किंगफिशर एयरलाइंस लगातार सेवा कर चुकाने में चूक कर रही है। वह साप्ताहिक भुगतान नहीं कर पा रही और उसके ज्यादातर बैंक खाते फ्रीज किए जा चुके हैं। विभाग ने किंगफिशर के ज्यादातर बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं और यह विमानन कंपनी बेहद सीमित संख्या में उड़ानों का परिचालन कर रही है। ऐसे में एयरलाइंस के लिए बकाया का भुगतान मुश्किल है, क्योंकि नकदी का प्रवाह बिल्कुल ठहरा हुआ है।
बताया जाता है कि किंगफिशर ने पिछले साल नवंबर से यात्रियों से जुटाए गए सेवा कर को नियमित रूप से जमा नहीं कराया है। वह लगातार इस राशि का इस्तेमाल अन्य उद्देश्यों के लिए कर रही है।
एयरलाइन द्वारा सेवा कर चुकाने में चूक शुरू होने के बाद से विभाग उसके बैंक खातों को फ्रीज कर रहा है।
विजय माल्या प्रवर्तित एयरलाइंस पर कुल बकाया 140 करोड़ रुपये था। उसके बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के बाद यह 60 करोड़ रुपये पर आ गया है। सोलंकी ने कहा, बकाया का पूर्ण भुगतान मुश्किल है। इसका एकमात्र रास्ता तभी निकल सकता है जबकि किसी विदेशी भागीदार के जरिये एयरलाइन को धन मिले। माल्या ने बुधवार को बेंगलुरु में कहा था कि किंगफिशर की विदेशी एयरलाइन कंपनियों से बात चल रही है। यूबी समूह की सालाना आम बैठक के मौके पर उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि इस बारे में हमारी बातचीत चल रही है।
सोलंकी ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की एयर इंडिया पर भी विभाग का 250 करोड़ रुपये बकाया है। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया ने बताया है कि उसको जल्द इक्विटी निवेश मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद वह भुगतान करने में सफल रहेगी।
एक रणनीतिक पहल के तहत सरकार ने हाल में विदेशी एयरलाइंस को घरेलू विमानन कंपनियों में सीधे 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी खरीदने की अनुमति दे दी। किंगफिशर फिलहाल सात विमानों के जरिये प्रतिदिन 50 उड़ानों का परिचालन कर रही है। उसकी उम्मीद अब वित्तीय संकट से निकलने के लिए एफडीआई पर टिकी है।
किंगफिशर पर 17 बैंकों का 7,000 करोड़ रुपये का दीर्घावधि का कर्ज बकाया है। इसके अलावा उस पर आयकर बकाया तो है ही। एयरलाइन का कुल नुकसान 8,000 करोड़ रुपये का है।