खास बातें
- रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने कहा कि हमारे मौद्रिक कदमों के चलते मुद्रास्फीति नीचे आ रही है।
New Delhi: भारतीय रिजर्व बैंक ने मंगलवार को आशंका जताई कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें तथा जिंस के दाम, मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के प्रयासों को पटरी से उतार सकते हैं। मुद्रास्फीति अब सामान्य या नरम होती नजर आ रही है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर सुबीर गोकर्ण ने संवाददाताओं से कहा कि हमारे मौद्रिक कदमों के चलते मुद्रास्फीति नीचे आ रही है। लेकिन खाद्य तथा ऊर्जा कीमतों के कारण इसके 'फिर बढने का जोखिम' बना हुआ है। उन्होंने कहा कि इस समय कच्चे तेल की कीमतें बड़ा जोखिम हैं क्योंकि हम नहीं कर सकते कि तेल कीमतें कहां तक बढेंगी और कब स्थिर होंगी। भारतीय रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए मार्च 2010 के बाद नीतिगत दरों में सात बार बढोतरी कर चुका है जो जनवरी में घटकर 8.23 प्रतिशत रह गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम 116 डालर प्रति बैरल से उपर बने हुए हैं। गोकर्ण ने कहा कि केंद्रीय बैंक ने सोच समझकर तथा धीरे धीरे जो कदम उठाए हैं उनका 'इच्छित असर मुख्य मुद्रास्फीति पर देखा गया।'