खास बातें
- वार्षिक महंगाई दर करीब 9.72 फीसदी दर्ज की गई, जिसके कारण रिजर्व बैंक द्वारा फिर एक बार मुख्य दरों में वृद्धि की सम्भावना प्रबल हो गई।
नई दिल्ली: थोक कीमतों पर आधारित वार्षिक महंगाई दर सितम्बर में मामूली गिरावट के बावजूद दहाई अंक के करीब 9.72 फीसदी दर्ज की गई, जिसके कारण भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा फिर एक बार मुख्य दरों में वृद्धि की सम्भावना प्रबल हो गई है। अगस्त माह में महंगाई दर 9.78 फीसदी थी। शुक्रवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों में जुलाई की अस्थाई महंगाई दर को भी 9.22 फीसदी से बढ़ाकर 9.36 फीसदी कर दिया गया। सितम्बर में लगातार 10वें माह महंगाई दर नौ फीसदी से ऊपर दर्ज की गई, जिससे रिजर्व बैंक पर महंगाई कम करने के कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है। रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने गुरुवार को कहा था कि महंगाई दर सुविधाजनक स्तर से काफी ऊपर नौ फीसदी पर है। समीक्षाधीन अवधि में प्राथमिक वस्तुओं के सूचकांक में 11.84 फीसदी की, जबकि ईंधन और बिजली सूचकांक में 14.09 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। थोक मूल्य सूचकांक में सबसे अधिक हिस्सेदारी रखने वाले विनिर्मित वस्तुओं के सूचकांक में 7.69 फीसदी की तेजी दर्ज की गई, जबकि खाद्यान्न सूचकांक में 9.23 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। रिजर्व बैंक हालांकि पहले से यह संकेत देता रहा है कि जब तक महंगाई दर सुविधाजनक दायरे में नहीं आएगी, तब तक दरों में वृद्धि का सिलसिला जारी रहेगा, लेकिन जुलाई और अगस्त माह में देखी गई औद्योगिकी सुस्ती के कारण रिजर्व बैंक दरों में अधिक वृद्धि से बच सकता है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर केसी चक्रवर्ती ने कहा, "9.3 फीसदी या 9.8 फीसदी से कुछ भी फर्क नहीं पड़ता। महंगाई फिर भी ऊंचे स्तर पर है।" उन्होंने कहा, "दुनिया में कहीं भी महंगाई बढ़ने पर ब्याज दर में वृद्धि होगी। मेरे पास महंगाई कम करने का और कोई औजार नहीं है।"