यह ख़बर 29 जून, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'मुद्रास्फीति के दबाव के बावजूद वृद्धि दर 8.5% रहेगी'

खास बातें

  • प्रणब ने कहा कि मुद्रास्फीति को काबू में करने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में वृद्धि के बावजूद चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि 8.5 प्रतिशत रहेगी।
वाशिंगटन:

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि मुद्रास्फीति को काबू में करने के लिए रिजर्व बैंक द्वारा नीतिगत दरों में वृद्धि के बावजूद चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि 8.5 प्रतिशत रहेगी। मुखर्जी ने साक्षात्कार में कहा, मैं अभी भी अपने अनुमान पर कायम हूं जिसमें मैंने आर्थिक वृद्धि दर 8.5 फीसद रहने की बात कही थी। हमें कुछ समय इंतजार करना होगा लेकिन यह 8 प्रतिशत प्लस से कम नहीं होगी। वित्तमंत्री अमेरिका-भारत आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग सम्मेलन में भाग लेने के लिए यहां आए हुए हैं। सम्मेलन का आयोजन भारतीय उद्योग परिसंघ एवं वाशिंगटन स्थित शोध संस्थान ब्रुकिंग इंस्टीट्यूट ने किया था। मुखर्जी ने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक वृद्धि एवं मुद्रास्फीति में संतुलन बैठाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमें मुद्रास्फीति पर लगाम लगाना जरूरी है। साथ ही हमें उच्च वृद्धि दर भी चाहिए। हमारे जैसी विकासशील देश में, अगर हम मुद्रास्फीति को प्रबंधन अनुकूल स्तर पर नहीं ला सकते तो कमजोर लोगों की समस्या बढ़ेगी वे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।उल्लेखनीय है कि रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति पर शिकंजा कसने के लिए प्रमुख नीतिगत दरों में मार्च 2010 से लेकर अबतक 10 बार वृद्धि की है। मुद्रास्फीति इस समय 9 प्रतिशत से उपर है। मई महीने में यह 9.06 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों का कहना है कि नीतिगत दरों में वृद्धि से आर्थिक वृद्धि पर नकारात्मक असर पड़ सकती है।


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