यह ख़बर 17 अप्रैल, 2012 को प्रकाशित हुई थी

उद्योग जगत ने किया दरों में कटौती का स्वागत

खास बातें

  • भारतीय उद्योग जगत ने मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक के कुछ प्रमुख नीतिगत दरों में कटौती के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे निवेश बढ़ेगा और कारोबारी संवेदना बेहतर होगी।
नई दिल्ली:

भारतीय उद्योग जगत ने मंगलवार को भारतीय रिजर्व बैंक के कुछ प्रमुख नीतिगत दरों में कटौती के फैसले का स्वागत किया और कहा कि इससे निवेश बढ़ेगा और कारोबारी संवेदना बेहतर होगी।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने और अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने की एक कोशिश के तहत मंगलवार को प्रमुख दरों में 50 आधार अंकों की कटौती की घोषणा की। इससे आवासीय, वाहन और वाणिज्यिक ऋण पर ब्याज दर घटने का अनुमान है।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने आरबीआई की वार्षिक मौद्रिक नीति के बारे में कहा, "रेपो दर में 50 आधार अंकों की कटौती स्वागत योग्य कदम है। आर्थिक विकास दर और औद्योगिक उत्पादन विकास (आईआईपी) दर में गिरावट को देखते हुए इसकी काफी जरूरत थी।" उन्होंने कहा, "रेपो दर में कटौती से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा साथ ही एक स्पष्ट संदेश जाएगा कि विकास को काफी महत्व दिया जा रहा है।"

आरबीआई के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने चालू वित्त वर्ष के लिए मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए कहा कि रेपो दर को 8.50 फीसदी से घटाकर आठ फीसदी किया जा रहा है। इस तरह रिवर्स रेपो दर स्वत: सात हो जाएगी, जो अभी 7.50 फीसदी है।

रेपो दर रिजर्व बैंक द्वारा व्यावसायिक बैंकों को दिए गए ऋण पर लगाया जाने वाला ब्याज होती है जबकि रिवर्स रेपो दर रिजर्व बैंक के पास व्यावसायिक बैंकों द्वारा जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज होती है।

इन दरों में कटौती से व्यावसायिक बैंक सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में आरबीआई में अपना धन जमा न करने के प्रति आकर्षित होंगे और इसके बदले वे धन को व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए ऋण में लगाएंगे।

उद्योग जगत की एक अन्य प्रतिनिधि संस्था एसोसिएटेड चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने भी कटौती का स्वागत किया।

एसोचैम के महासचिव डीएस रावत ने कहा, "इससे सस्ते कर्ज की जमीन तैयार हो चुकी है और निवेश का माहौल बना है। हालांकि इससे महंगाई के दबाव की भी वापसी हो सकती है।"

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

रावत ने कहा, "ऊंची ब्याज दरों के कारण लगभग दो सालों से नए निवेश और औद्योगिक उत्पादन में कमी देखी जा रही थी। आरबीआई ने सुस्ती दूर करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।"