यह ख़बर 18 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

'उत्पाद शुल्क, सेवा कर वृद्धि से नहीं मिलेंगे वांछित परिणाम'

खास बातें

  • उद्योग जगत ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से कहा कि उत्पाद शुल्क और सेवा कर दरों में वृद्धि से उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ेगी जिसके परिणामस्वरूप महंगाई बढ़ेगी।
नई दिल्ली:

उद्योग जगत ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी से कहा कि उत्पाद शुल्क और सेवा कर दरों में वृद्धि से उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ेगी जिसके परिणामस्वरूप महंगाई बढ़ेगी। ऐसे में वांछित परिणाम मिलना मुश्किल होगा। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के साथ तीनों वाणिज्य एवं उद्योग मंडल के अध्यक्ष तथा उनके प्रतिनिधियों की साझा बैठक में यह विचार सामने आए।

उद्योग मंडल सीआईआई के अध्यक्ष बी मुथुरमन ने कहा, ‘उत्पाद शुल्क तथा सेवा कर की दरों में वृद्धि करने के लिए यह उचित समय नहीं था। उन्होंने इसपर निराश व्यक्त करते हुए कहा इससे न केवल मंद पड़ रही मुद्रास्फीति में तेजी आएगी बल्कि कच्चे माल की लागत बढ़ने से उद्योग पर भी दबाव बढ़ेगा।’

टाटा स्टील के उपाध्यक्ष मुथुरमन ने कहा कि शुल्क में वृद्धि से वांछित राजस्व प्राप्ति की संभावना भी कम है बल्कि इसके उलट इससे आर्थिक वृद्धि नरम होगी और मुद्रास्फीति दबाव बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री राजकोषीय स्थिति में सुधार के लिए बुरी तरह खस्ताहाली में पहुंच चुके सार्वजनिक उपक्रमों के पास पड़ी भूमि और दूसरी परिसंपत्तियों का आकलन कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का करीब तीन लाख करोड़ रुपये विभिन्न कर विवादों में फंसा हुआ है। सरकार को इसके लिए न्यायालय से बाहर समझौते कर राजस्व वसूली बढ़ानी चाहिए।

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मुखर्जी ने 2012-13 के बजट में उत्पाद शुल्क तथा सेवा कर की दर को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत कर दिया। इससे सरकार को 45,940 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है। इसके साथ ही सेवाकर का दायरा भी व्यापक बना दिया गया है।