खास बातें
- वर्ष 2012-13 के लिए पेश बजट को लेकर निराशा जताते हुए उद्योग जगत ने कहा कि अप्रत्यक्ष करों के जरिए 45,940 करोड़ रुपये जुटाने की कवायद से महंगाई और बढ़ेगी।
नई दिल्ली: वर्ष 2012-13 के लिए पेश बजट को लेकर निराशा जताते हुए उद्योग जगत ने कहा कि अप्रत्यक्ष करों के जरिए 45,940 करोड़ रुपये जुटाने की कवायद से महंगाई और बढ़ेगी। इसके चलते रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरें घटाना मुश्किल हो जाएगा।
अगले वित्त वर्ष के लिए बजट प्रस्तावों पर भारतीय कंपनियों ने सकारात्मक से ज्यादा नकारात्मक टिप्पणी की। उनकी सबसे अधिक चिंता चौतरफा उत्पाद शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किए जाने और सेवाकर की दर बढ़ाए जाने को लेकर है।
बजाज ऑटो के चेयरमैन राहुल बजाज ने कहा, ‘उद्योग के लिए सब कुछ नकारात्मक है। यह समझने योग्य है, लेकिन स्वीकार्य नही है।’
गोदरेज समूह के चेयरमैन आदि गोदरेज, बायोकान की सीएमडी किरण मजूमदार शॉ और जेके आर्गनाइजेशन के निदेशक हर्ष पति सिंघानिया का मानना है कि चौतरफा करों में वृद्धि से मुद्रास्फीति और बढ़ेगी।
आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक व सीईओ चन्दा कोचर ने आशंका जाहिर की कि ब्याज दरें शायद ही नीचे आएं। उन्होंने कहा, ‘मुझे आशा नहीं है कि रिजर्व बैंक अप्रैल में दरों में कटौती कर पाएगा।’
फिक्की के अध्यक्ष आरवी कनोरिया ने कहा, ‘यह अर्थव्यवस्था में तेजी लाने नहीं जा रहा है।’
वहीं, सीआईआई के अध्यक्ष बी. मुतुरमन ने कह कि उन्हें काफी अधिक उम्मीदें थी, लेकिन उत्पाद शुल्क से जुड़े प्रस्तावों से कीमतें बढ़ेंगी।
एसोचैम के अध्यक्ष आरएन धूत ने कहा कि वह व्यक्तिगत आयकर छूट सीमा बढ़ाकर ढाई लाख रुपये किए जाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन ऐसा नहीं किया जाना निराशाजनक है।
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के बजट प्रस्तावों ने शेयर बाजार को भी निराश किया जिससे बंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 210 अंक टूटकर बंद हुआ।