नई दिल्ली: गूगल, टेमासेक और बैन एंड कंपनी की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की इंटरनेट अर्थव्यवस्था 2030 तक छह गुना बढ़कर एक ट्रिलियन डॉलर हो जाने की उम्मीद है. इसी दौरान अगले सात वर्षों में परिवारों की आय दोगुनी हो सकती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2030 में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में इंटरनेट अर्थव्यवस्था की हिस्सेदारी 4-5% से बढ़कर लगभग 12-13% हो जाएगी, जिसमें 350 मिलियन डिजिटल भुगतान उपयोगकर्ता और 220 मिलियन ऑनलाइन खरीदार शामिल हैं.
भारत के प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 'ई-अर्थव्यवस्था' का योगदान 2022 में 48% से बढ़कर 2030 में 62% होने की उम्मीद है.
'द ई-कॉनॉमी ऑफ ए बिलियन कनेक्टेड इंडियंस' शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की इंटरनेट अर्थव्यवस्था 2022 में लगभग 175 बिलियन डॉलर की खपत से एक ट्रिलियन की ओर बढ़ रही है, जो उपभोक्ता व्यवहार और व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र के विकास में निरंतर बदलाव के कारण है.
यह ग्रोथ ऐसे उपभोक्ताओं पर केंद्रित होगी जो अपनी घरेलू आय को 2030 तक दोगुना कर लेंगे. यानी 2030 तक लगभग 2,500 डॉलर से 5,500 डॉलर तक घरेलू आय कर लेंगे.
उपभोक्ताओं और निवेशकों के सर्वेक्षण के साथ-साथ बैन एंड कंपनी के विश्लेषण के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि टियर 2+ शहरों में डिजिटल सेवाओं और उत्पादों की भूख मेट्रो और टियर -1 शहरों में मांग के बराबर हो सकती है.
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि बिजनेस-टू-कंज्यूमर (बी2सी) ई-कॉमर्स डिजिटल सेवाओं की अग्रणी हिस्सेदारी को बनाए रखना जारी रखेगा, जो 2030 तक पांच-छह गुना बढ़कर लगभग 350-380 बिलियन डॉलर हो जाएगा.
भारत के ऑनलाइन खरीददारों के भी तब तक दोगुने होने की उम्मीद है.
"तीन मूलभूत ताकतें - उपभोक्ता द्वारा डिजिटल माध्यम को अपनाना, व्यवसायों द्वारा प्रौद्योगिकी निवेश, और इंडिया स्टैक के साथ डिजिटल लोकतंत्रीकरण - ने भारत को अपने डिजिटल परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर ला दिया है.
गूगल इंडिया के कंट्री हेड और वाइस प्रेसिडेंट संजय गुप्ता ने कहा कि उपभोग क्षमता में संरचनात्मक बदलाव स्टार्ट-अप्स, बड़े व्यवसायों और एमएसएमई के लिए भारत की इंटरनेट अर्थव्यवस्था को छह गुना की अनुमानित वृद्धि की ओर ले जाने के लिए एक बड़ा अवसर खोल रहे हैं.